भाजपा-शिअद की ‘दोस्ती’ पर फैसला लेंगे मोदी और शाह, दिल्ली में आज होगी संसदीय बोर्ड की बैठक

हरियाणा विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों में प्रदेश भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के संबंधों में थोड़ी खट्टास पैदा हो गई है। पंजाब के माफिक हरियाणा में भी भाजपा के साथ कदमताल कर आगे बढ़ने की चाहत रखने वाला अकाली दल इन दिनों हरियाणा भाजपा से नाराज है।
जिसके चलते शिअद नेताओं ने हरियाणा में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। अकालियों के हरियाणा में साथ चलने के प्रस्ताव पर हालांकि प्रदेश भाजपा ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है। बल्कि प्रदेश भाजपा ने शिअद के साथ गठजोड़ के मुद्दे को केंद्रीय नेतृत्व पर ही छोड़ दिया है।
रविवार शाम को दिल्ली में भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक होनी है। बैठक में हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न सीटों पर प्रत्याशियों के नाम तय करने पर चर्चा होगी। बैठक में नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अध्यक्ष जेपी नड्डा, डा. अनिल जैन, सीएम मनोहर लाल, प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला समेत अन्य भाजपा नेता शामिल रहेंगे। संभवत: इसी बैठक में हरियाणा में भाजपा-शिअद की ‘दोस्ती’ पर भी चर्चा हो सकती। उधर, हरियाणा भाजपा के नेताओं यह साफ कर दिया है कि इस पर फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को ही लेना है।
इसलिए हरियाणा भाजपा से नाराज हैं अकाली
हरियाणा में शिअद नेता कुछ मसलों को लेकर भाजपा से नाराज हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है विगत दिनों दिल्ली में हरियाणा की कालांवली सीट से शिअद के एकमात्र विधायक बलकौर सिंह को भाजपा में शामिल करना। जबकि शिअद हरियाणा में इस बार भाजपा के साथ गठजोड़ कर चुनाव लड़ने की इच्छा पाले हुए थी। इसी साल लोकसभा चुनाव में भी शिअद ने हरियाणा में भाजपा को पूरा समर्थन देते हुए अपना कोई प्रत्याशी मैदान में खड़ा नहीं किया था।
उस वक्त भी यह बात चली थी कि इसी साल होने वाली विधानसभा चुनाव में भाजपा भी शिअद को कुछ सीटें देगी। अकाली नेताओं ने बाकायदा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलकर उनसे इस विषय पर चर्चा भी की थी। लेकिन अब हरियाणा भाजपा अपने ‘मिशन 75 प्लस’ को अकेले दम पर ही हासिल करना चाहती है।
प्रदेश स्तर के अधिकतर भाजपा नेता भी हरियाणा में फिलहाल किसी से कोई गठजोड़ के पक्ष में नहीं है। इसी बात को लेकर हरियाणा में भाजपा के साथ चलने की इच्छा पाले शिअद नेता नाराज हैं। उधर, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल भी पिछले दिनों यह साफ कर चुके हैं कि भले ही पंजाब में अकाली-भाजपा का गठजोड़ है, लेकिन हरियाणा में ऐसा कभी नहीं रहा। सीएम यह भी कह चुके हैं किसी दल से गठजोड़ का फैसला हमेशा हाईकमान लेता है, लिहाजा ये मसला भी हाईकमान के स्तर का है।
अकाली कभी नहीं रहे हरियाणा में भाजपा का साथी
राजनीतिक इतिहास यदि देखें तो हरियाणा में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा की राहें हमेशा जुदा रही हैं। चौटाला और बादल परिवार की पारिवारिक नजदीकियों के चलते अकाली दल ने हमेशा हरियाणा में इनेलो के साथ मिलकर ही चुनाव लड़े हैं।
मगर इस लोकसभा चुनाव से पहले एसवाईएल के मुद्दे पर इनेलो ने शिअद से अपना सियासी नाता तोड़ दिया था। जबकि शिअद नेताओं का दावा था कि चौटाला कुनबे के विघटन के चलते शिअद ने इनेलो का साथ छोड़ दिया है। इसके बाद शिअद ने हरियाणा में भाजपा से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी थीं, क्योंकि पंजाब और दिल्ली में शिअद का भाजपा से पहले ही गठबंधन चल रहा है।
सुखबीर भी नाराज, अब बना रहे भावी रणनीति
शिअद अध्यक्ष एवं सांसद सुखबीर बादल भी हरियाणा भाजपा के इस फैसले से खासे नाराज हैं। उन्होंने अकाली विधायक बलकौर सिंह को भाजपा में शामिल करने के सियासी घटनाक्रम को भाजपा का विश्वासघात करार दिया है। सुखबीर का कहना है कि 25 साल से शिरोमणि अकाली दल भाजपा के साथ गठबंधन का धर्म निभा रहा है, लेकिन अकाली विधायक को भाजपा में शामिल कर लेना तो गठबंधन धर्म के विरुद्ध है।
उनके अनुसार हरियाणा भाजपा अब खुद विधानसभा चुनाव शिअद के साथ लड़ने के अपने वादे से पीछे हट रही है। इसलिए अकाली अब अपनी भावी चुनावी रणनीति बना रहे हैं। इस रणनीति के तहत अकाली दल ने हरियाणा में फिलहाल 30 सीटों पर पैनल फाइनल किया है। इन सीटों पर 150 दावेदारों ने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। मगर अभी यह तय किया जाना बाकी है कि वास्तव में शिअद हरियाणा में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
हरियाणा में अंबाला सिटी, नारायणगढ़, शाहबाद, मुलाना, कालांवली, डबवाली, ऐलनाबाद, पिहोवा, फतेहाबाद, टोहाना, लाडवा समेत कई विधानसभा ऐसी सीटों हैं, जहां सिख वोटर बहुत अच्छी संख्या में है। कई सीटें तो ऐसी हैं जो पंजाब की सीमाओं से सटी हैं और इन क्षेत्रों में अकाली दल का अच्छा प्रभाव और वोट बैंक भी है। लोकसभा चुनाव से पहले हरियाणा भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव साथ लड़ने का आश्वासन दिया था। मगर अब भाजपा विश्वासघात कर रही है। इसलिए अभी तक तो शिअद ने हरियाणा में अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। – सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़, वाइस प्रेसिडेंट, शिरोमणि अकाली दल
हरियाणा में भाजपा के साथ किसी पार्टी का गठबंधन होना है या पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी? यह विषय केंद्रीय नेतृत्व का है और निर्णय भी उन्हीं को लेना है। रविवार शाम को भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक होनी हैं। सारी बातें उसमें साफ हो जाएंगी, मैं इस विषय में और ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। – सुभाष बराला, प्रदेशाध्यक्ष हरियाणा भाजपा।
