मां का इलाज कराने जा रहा था युवक, बेरिकेड्स हटाने पर युवक का पुलिस से विवाद

मां का इलाज कराने जा रहा था युवक, बेरिकेड्स हटाने पर युवक का पुलिस से विवाद
आयोग ने गृह सचिव, डीआईजी एवं कलेक्टर, भोपाल से तीन दिन में मांगा प्रतिवेदन
भोपाल शहर के कोलार इलाके में बीते शनिवार की शाम पुलिस बेरिकेड्स हटाने को लेकर एक युवक का कोलार पुलिस से विवाद हो गया। युवक अपनी मां का इलाज कराने लेकर जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार कोलार के अनुपम अस्पताल-विनीत कुंज तिराहे में बीते शनिवार की शाम 6.30 बजे एक युवक अपनी मां को इलाज के लिये ओला लेकर जा रहा था। तिराहे में बैरिकेड्स लगे होने के कारण पुलिस ने उसे दूसरे मार्ग से जाने को कहा, जिसपर युवक मां को इलाज के लिये लेकर जाने का दावा करने लगा। इसी दौरान पुलिसकर्मियों और युवक के बीच वाद-विवाद होने लगा। इसके बाद आधा दर्जन पुलिस वाले वहां पहुंच गये और उसे डायल-100 में उठाकर ले जाने लगे। इस बीच इलाज के लिये जा रही मां पुलिस के सामने गिड़गिड़ाती रही, फिर भी युवक को नहीं छोड़ा। बाद में पूरी जानकारी मिली, तो समझाइश देकर छोड दिया। इस मामले में आयोग ने कहा है कि कोरोना कफर्यू के संबंध में कलेक्टर, भोपाल द्वारा जारी आदेश क्रमांक 251 दिनांक 17.4.2021 के बिन्दु क्रमांक 11 में अस्पताल/नर्सिंग होम हेतु आवागमन कर रहे नागरिक एवं एवं कर्मियों को छूट प्रदान की गई है। अतः आवागमन के रास्ते पर पूर्ण रूप से बैरिकेड्स लगाकर रोकने एवं अन्य लम्बे रास्ते से किसी मरीज को अस्पताल जाने में विवश करने की घटना प्रथम दृष्टया मानव अधिकार का उल्लंघन होना प्रतीत होती है।
आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन ने इस घटना पर त्वरित संज्ञान लेकर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, गृह विभाग, मंत्रालय, उप पुलिस महानिरीक्षक, भोपाल तथा कलेक्टर, भोपाल से अगले तीन दिन में (29 अप्रैल 2021 तक) प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने एक दैनिक समाचार पत्र के 25 अप्रैल 2021 के अंक में प्रकाशित खबर की छायाप्रति उपरोक्त अधिकारियों को भेजकर घटना के संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि भोपाल शहर में कुछ स्थानों पर पूर्ण रूप से बैरिकेड्स लगाकर रास्ते से आवागमन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित क्यों किया गया है, जबकि कलेक्टर, भोपाल के कफ्र्यू आदेश क्रमांक 251 दिनांक 17.4.2021 के बिन्दु क्रमांक 11 में अस्पताल/नर्सिंग होम हेतु आवागमन कर रहे नागरिकों/कर्मियों को छूट प्रदान की गई है। आयोग ने यह भी पूछा है कि पुलिसकर्मियों द्वारा बैरिकेड्स लगाकर कफ्र्यू आदेश से छूट प्राप्त नागरिकों को लम्बे रास्ते से होकर जाने हेतु विवश क्यों किया जा रहा है, जबकि तुरन्त इलाज हेतु अस्पताल न पहुंचने पर किसी मरीज का जीवन संकटापन्न स्थिति में आ जाने की आशंका होती है। उल्लेखनीय है कि घटना के संबंध में एसपी साई कृष्ण एस थोटा का कहना है कि अनुपम चैराहे पर बेरिकेड लगाया गया था। युवक से कहा गया कि वह बेरिकेड ना खोलें, दूसरी सडक का इस्तेमाल करें। इस पर युवक भडक गया। पुलिस उसे थाने ले गई थी, वहां से उसे छोड दिया।
