मिसेज इंडिया इंटरनेशनल तेजस्विनी सिंह के ख्वाबों के सच हो जाने की दास्तां

पापा कहते थे बड़ा नाम करेगी
उत्तरप्रदेश एक ऐसा राज्य जहां आज भी लोगों की मानसिकता लड़का और लड़की को ईक्वेल नहीं समझती । वर्ष 1989 में जब तेजस्विनी का जन्म हुआ उस वक्त इस मानसिकता का प्रभाव आज से भी कहीं ज्यादा था। तेजस्विनी अपने परिवार में दूसरी बेटी थीं। उनके जन्म के बाद कई लोगों ने उनके परिवार का दो बेटियां होने पर मजाक बनाया। कई ने यह तक कहा कि दो बेटियों को इतनी महंगाई के जमाने में कैसे पालोगे। मगर तेजस्विनी के पेरेंट्स के लिए वे हमेशा उनके दिल का तुकड़ा थीं। वह बताती हैं, ‘मेरे पेरेंट्स के ख्यालात कभी भी लड़का और लड़की में डिफ्रेंस करने वाले नहीं थे। पापा ने तो हमेशा हम दोनों बहनों को बेटों की तरह पाला। मेरा भाई भी है मगर उसमें और हम दोनों बहनों में कभी फर्क नहीं समझा। पापा हमेशा मेरे लिए बोलते थे कि बेटी है तो क्या हुआ बेटे से ज्यादा नाम कमाएगी।’
बचपन से ही क्रिएटिव थीं तेजस्विनी
तेजस्विनी बचपन से ही पढ़ाई में तेज थीं। मगर कला के प्रति उनका लगाव अलग था। पढ़ाई तेज होने के बावजूद तेजस्विनी ने मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स में कभी रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने अपनी क्रिएटिविटी को एक्सप्लोर करने के लिए जर्नलिज्म का क्षेत्र चुना। वह बताती हैं, ‘मुझे किताबों में सिमटे रहना कभी पसंद नहीं था। मैं हर उस चीज के बारे में जानना चाहती थी जो मेरे आसपास चल रही होती थी। इसलिए मेरे लिए जर्नलिज्म की फील्ड बेस्ट थी।अभी भी मैं
बिजनेसवुमन बनने का था सपना
तेजस्विनी जब 22 वर्ष की थीं तब उनके पिता लंबी बीमारी के चलते गुजर गए। पिता की कमी और उनसे मिले सपोर्ट के अभाव में तेजस्विनी कुछ वक्त के लिए इतनी डिप्रेस हो गईं कि उन्होंने जॉब भी छोड़ दी मगर तेजस्विनी के बुलंद हौसलों ने उन्हें ज्यादा दिन डिप्रेशन (डिप्रेशन में ना करें ये काम) में नहीं रहन दिया। वह बताती हैं, ‘जॉब छोड़ने के बाद यह तय कर लिया था कि अब कुछ अपना काम करुंगी। उसी वक्त मुझे स्किन एलर्जी हुई। कई मैडिकल ट्रीटमेंट लिए मगर एलर्जी ठीक नहीं हुई । तब मैंने काफी रिसर्च की और खुद से हर्बल प्रोडक्ट बनाए। उनसे अपना इलाज किया और तब जा कर मैं ठीक हो सकी।’ आज उन्हीं हर्बल प्रोडक्ट्स का तेजस्विनी बिजनेस भी करती हैं।
बिजनेस से मिसेज इंडिया इंटरनेशनल तक का सफर
ब्यूटी क्वीन बनने का सपना तो हर महिला देखती है मगर सच उन्हीं का होता है जिनमें उस लैवल तक पहुंचने का हौसला होता है। मगर तेजस्विनी के साथ बात कुछ अलग थी। वह ब्यूटी क्वीन तो बनना चाहती थीं मगर कभी यह नहीं सोचा था कि किसी प्रतियोगिता में भाग लेंगी। वह बताती हैं, ‘बिजनेस की वजह से कई लोगों के साथ होता था। एक बिजनेस मीटिंग के दौराना मेरी मुलाकात सौम्या चतुर्वेदी से हुई। पेशे से इमेज कंसेलटेंट सौम्या मुझे हमेशा ब्यूटी कॉन्टेस्ट, फैशन शो में पार्टीसिपेट करने के लिए कहा। सौम्या के साथ रहते रहते उसे मेरी सारी कमियों और स्ट्रॉन्ग प्वॉइंट्स के बारे में पता चल गया था। उसी ने मुझे मिसेज इंडिया इंटरनेशनल ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेने के लिए इंकरेज किया और उसी ने मेंरी पर्सनालिटी में कई सुधार किए। जिसकी बदौलत आज मैं यह क्राउन जीत पाई।’
प्रेशर को बनाया पैशन
छोटे शहर से होने के कारण तेजस्विनी में इस बात का हेजीटेशन पहले ही था कि दिल्ली मुंबई की स्टाइलिश लड़कियों के आगे वो कहां टिक पाएंगी मगर इस प्रेशर को ही तेजस्विनी ने अपना पैशन बनाया और इसे चुनौती की तरह लिया। वह बताती हैं, ‘ लखनऊ की लाइफ स्टाइल बहुत अलग है। हालाकि लखनऊ बहुत ही एडवांस्ड शहर है मगर यहां कलचर अभी दिल्ली मुंबई जैसा नहीं है। ऐसे में मैंने खुद की पर्सनालिटी को सुधारने के लिए बहुत महनत की। मेरी दोस्त सौम्या की मदद से मैंने अपने में बहुत सुधार किए। उन्हीं की वजह से मैं आज इस मुकाम पर हूं।’
