मुजफ्फरपुर में कोरोना से 15 मरीजों की मौत, दो दिनों में 30 की जा चुकी है जान

मुजफ्फरपुर । मुजफ्फरपुर में कोरोना वायरस ने अपने कहर बरपाया है। जिले में कोरोना वायरस से लगातार मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। लगातार दूसरे दिन जिले में 15 जिंदगियां कोरोना का निवाला बन गईं। इससे पहले बुधवार को भी 15 लोगों की जान कोरोना वायरस ने ले ली थी। इस तरह बीते 48 घंटों में 30 मौत से मुजफ्फरपुर कराह उठा है। जिला प्रशासन के निर्देश पर संचालित निजी अस्पतालों में 10 लोगों ने दम तोड़ा है, जबकि 8 लोगों की मौत उनके घरों में होम आइसोलेशन में हुई हैं। इस बीच ऑक्सीजन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। मुजफ्फरपुर के बेला इंडस्ट्रियल एरिया में एकमात्र ऑक्सीजन प्लांट है, जहां दिन-रात ऑक्सीजन सिलेंडर से भरे जा रहे हैं। प्लांट की सामान्य उत्पादन क्षमता 500 सिलेंडर की है, जबकि लिक्विड उपलब्ध होने पर 300 अतिरिक्त सिलेंडर भरे जाते हैं। जिले में बढ़ते कोविड-19 मरीजों की संख्या के मद्देनजर तकरीबन 1000 सिलेंडर प्रतिदिन ऑक्सीजन की आवश्यकता है। जानकारी के मुताबिक, ऑक्सीजन कोरोना से मौत का बड़ा कारण बन रहा है। हालांकि, जिला प्रशासन का दावा है कि मुजफ्फरपुर में ऑक्सीजन की उपलब्धता में कहीं कोई कमी नहीं है। इस बीच जिले के दामोदरपुर स्थित एक अन्य इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन प्लांट को मेडिकल सप्लाई की अनुमति दे दी गई है। लेकिन, एक संकट खड़ा हो गया है कि गाजियाबाद के प्लांट ने ऑक्सीजन लिक्विड के आपूर्ति से हाथ खड़े कर दिए हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर उदय बल्लभ ने कहा कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाने की वजह से गाजियाबाद प्लांट में फिलहाल लिक्विड सप्लाई करने से मना कर दिया है। राहत की बात यह है कि झारखंड से ऑक्सीजन लिक्विड की आपूर्ति अभी जारी है। गाजियाबाद के प्लांट से बात की जा रही है। इस बीच बुधवार को जिले के एक निजी कोविड-19 हॉस्पिटल से ऑक्सीजन की कमी को लेकर मरीजों को डिस्चार्ज करने की खबरें आई। सूचना मिलने पर जिला प्रशासन ने उस अस्पताल में ऑक्सीजन के 20 सिलेंडर तत्काल मुहैया करवाएं।
इस बारे में निजी कोविड-19 अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर का कहना है कि उनकी जरूरतों के मुताबिक ऑक्सीजन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। बीते 24 घंटों में जिन 15 लोगों ने दम तोड़ा है उसका दर्दनाक पहलू यह है कि जिले के दो बड़े व्यवसाई बंधुओं की मौत एक साथ हो गई।
नगर के छाता बाजार निवासी अजय चौधरी और अरुण चौधरी सगे भाई थे। दोनों कोरोना पॉजिटिव हो गए जिन्हें दो निजी अस्पतालों में दाखिल कराया गया था। महज ढाई घंटों के अंतराल पर दोनों की मौत हो गई। इनकी मौत से परिवार समेत पूरे शहर कोहराम का माहौल है। इधर मौसेरी बहन की शादी में दिल्ली से मुजफ्फरपुर पहुंचे 21 वर्षीय युवक ने कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अपने जन्मदिन के दिन ही दम तोड़ दिया। दिल्ली से लौटा पूरा परिवार एक होटल में क्वॉरेंटाइन है और 23 अप्रैल को होने वाली शादी में कोई शामिल नहीं हो रहा है।
जिले में इमरजेंसी ड्रग रेमडेसीविर को लेकर भी काफी बेचैनी की हालत है। मरीजों के परिजनों को यह दवा नहीं मिल रही है। उन्हें एक खास नंबर पर मैसेज करने और एक ईमेल आईडी पर मेल करने की बात कही जा रही है। मेल करने के बाद भी दवा उपलब्ध नहीं हो रही है। इस बीच रेमेडीसिविर और ऑक्सीजन की कालाबाजारी की खबरें भी उड़ने लगी है जिसके मद्देनजर जिला प्रशासन ने ढाबा दल का गठन कर दिया है। बता दें कि जिले में बीते 24 घंटों में 496 नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आए हैं। जिले में कोविड-19 पॉजिटिव केसेस की संख्या साढ़े चार हजार को पार कर गई है, इसे देखते हुए जिला प्रशासन नए-नए कंटेनमेंट जोन बना रहा है लेकिन एक बड़ी लापरवाही यह हो रही है कि करीब डेढ़ सौ बसों से रोज दिल्ली से लोग मुजफ्फरपुर पहुंच रहे हैं, जिनका टेस्ट नहीं हो रहा है और ये लोग सीधे अपने गांव पहुंच जा रहे हैं।
