रक्षा बंधन पर ट्राइब्स इंडिया बेचेगा राखी 

दिल्ली । भारत की आदिवासी कला और संस्कृति की अपनी अलग पहचान है। तेजी से बदलते दौर में, जहां आधुनिकता, तकनीक और विकास ने मानव जीवन में गहरी पैठ बना ली है । ऐसे समय में भारत में अभी भी 200 के लगभग जनजातियां देश के विभिन्न हिस्सों में पाई जाती हैं। इन जनजातियों के कलाकार आज भी अपनी मूल कला और शिल्प एवं परंपराओं को संरक्षित करने की कोशिश में लगे हैं। ट्राइफेड इन वंचित लोगों की आर्थिक मदद कर इन्हें सशक्त बनाने और मुख्यधारा में जोड़ने के लिए प्रयासरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के सपने को साकार करने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा और ट्राइफेड के एमडी प्रवीर कृष्ण आदिवासी उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध करने के तेजी से प्रयास कर रहे है। आदिवासी उत्पादों और हस्तशिल्पों को अधिक से अधिक अवसर दिलाने और बड़ी संख्या में लोगों तक उनके उत्पाद पहुंचाने के उद्देश्य से ट्राइफेड आदिवासी कलाकारों को नए डिजाइन विकसित करने के लिए प्रशिक्षित कर रहा है। महामारी के दौरान आदिवासी कारीगरों के कौशल विकास के प्रयास किए गए और उत्पादों को विकसित करने के लिए 17 प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मंजूरी दी गई, जिससे 340 आदिवासी कारीगरों को लाभ मिला और 170 नए डिजाइन वाले उत्पाद विकसित हुए। प्रशिक्षण के बाद कारीगरों द्वारा तैयार किये गए नए डिजाइन वैश्विक बाजार में लोगों को खूब आकर्षित कर रहे है। खूबसूरती और गुणवत्ता वाले उत्पादों को न केवल ट्राइब्स इंडिया के आउटलेट में बल्कि ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर भी बेचा जा रहा है। इन उत्पादों ने देश के साथ ही विदेशो में धूम मचा दी है।  ट्राइफेड ने आजीविका के लिए सराहनीय और बड़ी परिवर्तनकारी पहल की है जो जनजातीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाएगी।
सुसज्जित कार्यालय,100 करोड़ का टर्नओवर
राजधानी दिल्ली में लगभग 30,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला ट्राइफेड का कार्यालय अत्याधुनिक बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर से सुसज्जित है और नवीनतम सुविधाओं से युक्त हैं। इसमें जनजातीय मामलों के मंत्री, प्रबंध निदेशक, वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ऑफिस स्पेस है।
वर्तमान में ट्राइफेड का लगभग 100 करोड़ का टर्नओवर हो गया है। 125,000 कारीगर लगभग 1,00,000 उत्पाद तैयार कर रहे है।  जिसे देश भर में 127 ट्राइब्स इंडिया के शोरूम और ई-कॉमर्स वेबसाइटों के माध्यम से बेचा जा रहा है। ट्राइफेड देश भर में अपने ट्राइब्स इंडिया स्टोरों का विस्तार कर रहा है। 
वन धन योजना बनी संजीवनी 
ट्राइफेड जनजातीय लोगों के सशक्तिकरण के लिए कई कार्यक्रम चला रहा है। ट्राइफेड द्वारा संचालित वन धन योजना भी आदिवासियों के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। ट्राइफेड अब विभिन्न विभिन्न योजनाओं को एक साथ लाकर अपने कार्यों का विस्तार करने और इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए "संकल्प से सिद्धि-मिशन वन धन" के तहत विभिन्न जनजातीय विकास कार्यक्रमों को मिशन मोड में लॉन्च करने की योजना बना रहा है। इस मिशन के माध्यम से 50,000 वन धन विकास केंद्र, 3,000 हाट बाजार, 600 गोदाम, 200 मिनी ट्राइफूड यूनिट, 100 कॉमन फैसिलिटी सेंटर, 100 ट्राइफूड पार्क, 100 स्फूर्ति क्लस्टर, 200 ट्राइब्स इंडिया रिटेल स्टोर, ट्राइफूड और ट्राइब्स इंडिया के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की स्थापना और ट्राइब्स इंडिया ब्रांड बनाने का लक्ष्य बनाया जा रहा है।
रक्षा बंधन पर राखियां
रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला है। इसे मद्देनजर रखते हुये ट्राइब्स इंडिया कैटलॉग में एक विशेष राखी फीचर रखा गया है, जहां आकर्षक राखियां उपलब्ध हैं। ये राखियां देश की विभिन्न जनजातियों द्वारा हस्त-निर्मित हैं। रक्षाबंधन पर राखी और अन्य उपहार देने के लिये आप अपने सबसे नजदीकी ट्राइब्स इंडिया के शो-रूम या वेबसाइट के जरिये इन उत्पादों को खरीद सकते हैं। 

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