राम रहीम के बाद राधे मां पर कसा कानून का शिकंजा, कोर्ट का राहत देने से इनकार

राम रहीम प्रकरण के बाद अब खुद को देवी का अवतार बताने वाली राधे मां पर भी कानून का शिकंजा कसता दिख रहा है। मुंबई की अदालत ने राधे मां को जोर का झटका देते हुए उनका नाम दो साल पुराने घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामले से हटाने से इनकार कर दिया है।
सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां ने इस प्रकरण से खुद का नाम हटाने की मांग को लेकर बोरीवली कोर्ट में आवेदन दायर किया था। लेकिन अदालत ने नाम हटाने से इनकार कर दिया है।

अदालत में राधे मां ने दावा किया था कि उनका शिकायतकर्ता से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना था कि इस मामले को लेकर दर्ज कराई गई शिकायत में सीधे मुझ पर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं। इसलिए उनका नाम हटा दिया जाए।

मामले से जुडे़ तथ्यों व रिकार्ड पर गौर करने के बाद मजिस्ट्रेट एबी शेंडगे ने राधे मां के आवेदन को खारिज कर दिया। मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस प्रकरण में आरोपी(राधे मां) पर सीधे आरोप लगाए गए हैं, इसलिए राधे मां की इस दलील को स्वीकार नहीं किया जा सकता है कि उनका इस मामले से संबंध नहीं है।

गौरतलब है कि 32 वर्षीय निक्की गुप्ता नामक महिला  ने साल 2015 में अपने ससुराल के लोगों और राधे मां के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया था।

महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि राधे मां ने उसके ससुराल वालों को उसे परेशान करने के लिए उकसाया है। किंतु राधे मां ने महिला के आरोपों को निराधार बताया और अदालत में आवेदन दायर कर खुद का नाम इस मामले से हटाने का अनुरोध किया जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

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