राम रहीम को नहीं मिलेगी पैरोल, इस वजह से फंस सकता है कानूनी पेंच, आप भी जानिए नियम

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम जेल से बाहर आना चाहता है, लेकिन अभी उसे पैरोल नहीं मिल सकती। एक नियम की वजह से कानूनी पेंच फंस सकता है, आप भी जान लीजिए।
एडवोकेट करण सिंह नारंग का कहना है कि राम रहीम को खेती करने के लिए पैरोल मिलना मुश्किल है, क्योंकि हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी को कम से कम तीन साल तक रात और दिन मिलाकर सजा काटनी जरूरी होती है। पैरोल देने के लिए इस दौरान जेल में कैदी का अच्छा व्यवहार देखा जाता है। राम रहीम को जेल में अभी तीन साल पूरे नहीं हुए हैं। इसलिए बाबा को पैरोल मिलनी मुश्किल है।
जेल अधीक्षक ने इस संबंध में सिरसा प्रशासन को पत्र भी लिखा था। पत्र में बताया गया था कि राम रहीम दुष्कर्म मामले में भी सजायाफ्ता है। अभी तक सिरसा उपायुक्त ने जेल प्रशासन को कोई जवाब नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार, रोहतक के जेल अधीक्षक ने सिरसा के डीसी को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या राम रहीम को पैरोल देना उचित होगा या नहीं? क्योंकि राम रहीम सिंह की ओर से कृषि कार्य करने का हवाला देते हुए पैरोल की मांग की गई थी।
राम रहीम के वकील द्वारा बाबा की ओर से पैरोल की अर्जी दिए जाने के बाद जेल अधीक्षक सुनील सांगवान ने सिरसा उपायुक्त अशोक गर्ग से अपनी अनुशंसा देने के लिए कहा। इसके लिए ही पत्र लिखा गया है, जिसमें उल्लेख किया गया कि डेरा प्रमुख को सीबीआई कोर्ट द्वारा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी दोषी करार दिया गया है। इसके अलावा दो अन्य मामले भी लंबित हैं। अब सिरसा प्रशासन द्वारा जो अनुशंसा दी जाएगी, उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राम रहीम को सीबीआई कोर्ट द्वारा 25 जुलाई 2017 को दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिया गया था। दोनों मामलो में 28 अगस्त 2017 को उन्हें 10-10 साल की कैद और 15-15 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इसके अतिरिक्त एक सांध्य दैनिक के संपादक रामचंद्र छत्रपति की हत्या मामले में भी सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत सिंह को दोषी करार दिया था और सजा सुनाई थी।
