राहुल, कार्तिक और धोनी हैं नंबर चार के दावेदार

विश्व कप से ठीक पहले भारतीय टीम मध्यक्रम में नंबर चार स्थान पर किसको उतारे यह तय नहीं कर पा रही है। चयनकर्ताओं ने विजय शंकर को इस स्थान के लिये चुना पर वह आईपीएल में उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाये। केएल राहुल ने अच्छी फार्म में दिखाकर अपना दावा मजबूत किया है जबकि दिनेश कार्तिक और अनुभवी महेंद्र सिंह धोनी को भी इस स्थान पर भेजा जा सकता है। इनमें से शंकर, राहुल और कार्तिक को विश्व कप का अनुभव नहीं है। धोनी तीन विश्व कप में खेले हैं पर वह केवल एक बार 2007 में नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिये उतरे जिसमें उन्होंने 29 रन बनाये थे। ऐसे में कप्तान विराट कोहली तीसरे नंबर के बजाय चौथे नंबर पर भी उतर सकते हैं। कोहली ने विश्व कप 2011 के बाद नंबर तीन पर अच्छी जिम्मेदारी निभायी और यही वजह है कि विश्व कप 2015 में अजिंक्य रहाणे सात मैचों में इस स्थान पर बल्लेबाजी के लिये उतरे जिसमें उन्होंने 208 रन बनाये। एक मैच में सुरेश रैना ने यह जिम्मेदारी संभाली और 74 रन की पारी खेली। ये दोनों इस समय विश्व कप टीम में नहीं हैं।
विराट ने इस नंबर पर पांच मैचों में एक शतक की मदद से 202 रन बनाये थे। वहीं युवराज सिंह ने भी 2011 विश्व कप में के दो मैचों में इस स्थान पर एक शतक की मदद से 171 रन बनाये थे। भारत जब 1983 में विश्व चैंपियन बना था तब यशपाल शर्मा (तीन मैचों में 112 रन) और संदीप पाटिल (तीन मैचों में 87 रन) ने नंबर चार पर उपयोगी योगदान दिया था। दिलीप वेंगसरकर दो मैचों में इस स्थान पर उतरे थे जिसमें उन्होंने 37 रन बनाये थे। वेंगसरकर 1987 में पांच मैचों में नंबर चार बल्लेबाज के रूप में खेले थे जिसमें उनके नाम पर 171 रन दर्ज है। पहले दो विश्व कप में गुंडप्पा विश्वनाथ (कुल छह मैचों में 145 रन) ने यह भूमिका बखूबी निभायी थी जबकि 1992 में सचिन तेंदुलकर (सात मैच में 229 रन) के लिये यह नंबर तय था। तेंदुलकर ने विश्व कप में भारत की तरफ से नंबर चार पर सर्वाधिक 12 मैच खेले हैं जिनमें उनके नाम पर 400 रन दर्ज है। उनके बाद मोहम्मद अजहरूद्दीन (नौ मैचों में 238 रन) का नंबर आता है। वह 1996 में छह मैचों में नंबर चार पर उतरे थे लेकिन नाबाद 72 रन की एक पारी के अलावा कोई कमाल नहीं दिखा पाये थे।
