राह बदलें या न बदलें, सोंच जरूर बदल लें 

इन्दौर । हम कल भी थे, आज भी हैं लेकिन सोचने का रास्ता बदलना पड़़ेगा। हम अपनी राह बदलें या न बदलें, सोच जरूर बदल दें। सोच बदलने के लिए जीवन में चार ‘टी‘ के रास्ते पर चलना होगा। ये चार ‘टी‘ हैं – थेंक्स, ट्राय, थिंक और ट्रस्ट। जीवन में कुछ नया करने के लिए इन चार सूत्रों पर चल कर सफलता हांसिल की जा सकती है।
ये प्रेरक विचार हैं राष्ट्र संत, पद्मविभूषण प.पू. आचार्यदेव रत्नसुंदर सूरीश्वर म.सा. के, जो उन्होंने आज सुबह तिलक नगर स्थित चंदाप्रभु मांगलिक भवन पर आयोजित धर्म सभा में ‘कुछ नया करो‘ विषय पर व्यक्त किए। प्रारंभ में तिलक नगर जैन श्रीसंघ की ओर से कैलाश सालेचा, वीरेंद्र बम, मनोज जैन, संजय जैन, हेमंत रांका आदि ने आचार्यश्री एवं साधु-साध्वी भगवंतों की अगवानी की। आयोजन से जुड़े कल्पक गांधी ने बताया कि आचार्यश्री गुरूवार 27 जून को तिलक नगर में चंदाप्रभु मांगलिक भवन पर ‘कुछ अच्छा करो‘ विषय पर सुबह 9 से 10 बजे तक प्रवचन देेंगे।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में हमें जो कुछ मिला है, उसके लिए थेंक्स और जो नहीं मिला है उसके लिए पुरूषार्थ करे, शिकायत नहीं। सफलता हमारी राह देख रही है, उस तक पहुंचने का प्रयास अर्थात ट्राय करें। सुख का दरवाजा यदि बंद है तो दूसरे आठ दरवाजे तो खुले हैं उस एक दरवाजे से ही निकलने का आग्रह मत रखो। जो पाना चाहते थे वह नहीं मिला और जो नहीं पाना चाहते थे, वह मिल गया, इस स्थिति में सोचंे, थिंक क्योकि सोचने से ही उस परस्थिति से निकलने का रास्ता मिलेगा। यदि एक बार क्रोध करने से संबंध बिगड़ जाते हैं तो दूसरी बार क्रोध करना बुद्धिमानी नहीं हो सकती। चैथा कदम है ट्रस्ट। अपने प्रभु के प्रति  हमें पूर्ण भरोसा होना चाहिए। भगवान के प्रति हमेशा ‘अर्पण कर दूं हर प्यार तुम्हारे चरणों में, अब सौंप दिया इस जीवन का भार तुम्हारे चरणों में‘ का भाव होना चाहिए। साधना एक लाईन है, लेकिन समर्पण एक सर्कल है। न देखी हुई चीज को पाने के लिए देखी हुई चीज को छोड़ देना, इसी का नाम है ट्रस्ट। जीवन में आगे बढ़ने और कुछ नया करने के लिए इन चार सूत्रों पर अमल करे।

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