लोकसभा के मुकाबले विधानसभा में BJP का वोट शेयर घटता है, TMC का बढ़ता है, लेकिन वोटिंग में 1.5% की कमी दीदी के लिए चिंता की बात
बंगाल में अंतिम चरण का चुनावी रण खत्म होने के साथ एग्जिट पोल आ चुके हैं। नौ में से पांच एग्जिट पोल इशारा कर रहे हैं कि बंगाल में ममता सरकार वापसी कर रही है। लेकिन, तीन सर्वे में भाजपा बहुमत के 146 के आंकड़े को पार करती दिख रही है।
सभी एग्जिट पोल के औसत यानी पोल ऑफ पोल्स में TMC भाजपा से थोड़ा आगे दिखती है, लेकिन भाजपा उसे बहुमत से रोकती दिख रही है। पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक TMC को 143 और BJP को 138 सीट आती दिख रही हैं।
ये तो हुई एग्जिट पोल की बात। ये कितने सही होंगे यह तो 2 मई को काउंटिंग के वक्त ही साफ होगा। लेकिन, इस बार के विधानसभा चुनाव में वोटिंग परसेंटेज और पिछले चुनावों के वोटिंग पैटर्न को देखते हुए क्या तस्वीर बन सकती है, एक नजर उस पर डालते हैं…
वोटिंग परसेंटेज में थोड़ी कमी, लेकिन TMC को हो सकता है बड़ा नुकसान
राज्य में आठ चरणों में हुए चुनाव में चुनाव आयोग के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, 81.59% वोटिंग हुई है। जबकि 2016 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिश्त का आंकड़ा 83.02% था। 2016 में तृणमूल ने 211 सीट जीतकर बड़ी जीत हासिल की थी।
2021 में 2016 के असेंबली इलेक्शन के मुकाबले वोटिंग परसेंटेज करीब 1.5% कम है। जो टीएमसी के लिए चिंता की बात है क्योंकि बंगाल में जिस तरह हर सीट पर कांटे की लड़ाई दिख रही थी, उसमें 1.5% का फर्क काफी सीटों का अंतर पैदा कर सकता है। यह अंतर एग्जिट पोल में भी दिख रहा है। जो एग्जिट पोल तृणमूल को बहुमत का मार्क छूते दिखा रहे हैं, वह भी उसे पिछले चुनाव के मुकाबले 50 से 60 सीटों का नुकसान दिखा रहे हैं।
यह पैटर्न 2019 के लोकसभा चुनावों में भी दिखा था। 2019 के लोकसभा चुनावों में वोटिंग परसेंटेज 2016 के विधानसभा चुनाव 83.02 के मुकाबले गिरकर 81.67% रह गया था और भाजपा ने लोकसभा की 18 सीट जीत ली थीं। ऐसे में इस बार वोटिंग में गिरावट ने सीटों पर ज्यादा फर्क डाला तो तृणमूल बहुमत के आंकड़े से दूर भी रह सकती है।
वोटिंग परसेंटेज का दूसरा पहलू
हालांकि, कुछ चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि ममता सरकार दस साल से बंगाल में है और उसके एंटी इनकैंबेंसी फैक्टर भी है। ऐसे में ज्यादा वोटिंग उन्हें नुकसान भी पहुंचा सकती थी क्योंकि बढ़ा हुआ वोटिंग परसेंटेज ज्यादातर सत्ता के खिलाफ होता है।
बंगाल में पिछले की चुनावों से वोटिंग परसेंटेज एकाध फीसद के अंतर के साथ ऐसा ही रह रहा है, इसलिए इसके सहारे बड़ा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बल्कि फर्क इस बात से पड़ेगा कि लेफ्ट और कांग्रेस के वोटरों में कितना हिस्सा बीजेपी के साथ गया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में लेफ्ट और कांग्रेस का वोट घटकर 12 % के आसपास रह गया था। दोनों पार्टियों के वोट भाजपा की ओर शिफ्ट हो गए थे। अगर इस बार यह शिफ्टिंग ज्यादा हुई तो तृणमूल की मुश्किल बढ़ेगी।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव के वोटिंग पैटर्न का फर्क भाजपा के लिए चिंता की बात
2016 के बंगाल विधानसभा चुनाव में महज तीन सीट जीतने वाली भाजपा 2021 में सत्ता की दौड़ में है। इसकी सबसे बड़ी वजह है, 2019 के लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन। तब भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 40.6 % वोट शेयर के साथ 42 में से 18 लोकसभा सीटें जीत ली थीं। तृणमूल कांग्रेस ने 43.6 % वोट लेकर 22 सीट जीतीं थी। वोट परसेंटेज के लिहाज से बीजेपी तृणमूल से सिर्फ 3 % प्रतिशत पीछे थी।
भाजपा ने बंगाल के अपने पूरे चुनाव अभियान को आक्रामक हिंदुत्व के इर्द-गिर्द रखा। पार्टी को उम्मीद है कि इसके सहारे वह इन तीन प्रतिशत वोटों के अंतर को पाट देगी और राज्य की सत्ता पर काबिज हो जाएगी। लेकिन, यह गणित इतना सीधा भी नहीं है। बंगाल के पिछले कुछ लोकसभा और विधानसभा चुनावों के पैटर्न को देखा जाए तो इसे समझा जा सकता है।
2019 लोकसभा चुनाव के विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो ममता बनर्जी की तृणमूल ने 164 सीटों पर और बीजेपी ने 121 सीट पर बढ़त बनाई थी। कांग्रेस सिर्फ 9 सीट पर आगे थी। लेफ्ट किसी भी विधानसभा सीट पर आगे नहीं रहा था। लेकिन, अब 2014 के लोकसभा चुनाव पर आते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में बीजेपी को 17.02 % वोट मिले। लेकिन, 2016 के विधानसभा के चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 10.16 % हो गया।जबकि, तृणमूल का वोट शेयर 2014 लोकसभा चुनावों में 39.79 % था, जो 2016 के विधानसभा चुनावों में बढ़कर 44.91 % हो गया।
यह आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी को 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2016 के विधानसभा चुनावों में करीब 7 फीसद वोट कम मिले। यह पैटर्न यह बताता है कि भाजपा का वोट लोकसभा चुनाव के मुकाबले विधानसभा चुनाव में घटता है। 2014 के लोकसभा और 2016 के विधानसभा का यह पैटर्न अगर 2021 के विधानसभा चुनाव में भी रिपीट होता है। तो भाजपा को 2019 लोकसभा चुनावों में मिला 40.6 % वोट शेयर घट भी सकता है।
सत्ता में आने के लिए भाजपा को यह पैटर्न तोड़ना होगा
भाजपा को अगर सत्ता पानी है तो उसे यह पैटर्न तोड़ना पड़ेगा और 2019 में मिले वोटों में 3 से 4 फीसदी की बढोत्तरी करनी होगी। जबकि अब तक के ट्रेंड के मुताबिक, विधानसभा चुनाव में उसके वोट घटे हैं। अगर यह भी मान लिया जाए कि भाजपा के वोट इस बार नहीं घटते और वह लोकसभा वाला प्रदर्शन दोहराती है तो भी वह बहुमत से दूर रह जाएगी। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 121 और टीएमसी 164 विधानसभा सीटों पर आगे थी।
क्या कांग्रेस-लेफ्ट बनेंगे किंग-मेकर?
बंगाल का पूरा चुनाव मोदी बनाम दीदी पर केंद्रित रहा है। लेकिन, ग्राउंड से आ रही रिपोर्ट और एग्जिट पोल इशारा कर रहे हैं कि हो सकता है कि कांटे की लड़ाई में तृणमूल और भाजपा दोनों बहुमत के आंकड़े से पीछे रह जाएं। ऐसे में बंगाल में सबसे कमजोर माना जा रहा लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन किंगमेकर की भूमिका में आ सकता है।
