‘शादी का झांसा देकर संबंध बनाना सहमति, बलात्कार नहीं’

नई दिल्ली। शादी का झांसा देकर बलात्कार करने के बढ़ते मामलों पर अदालत ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि बालिग लड़की या युवती अगर शादी के झांसे में आकर शारीरिक संबंध बनाने की इजाजत देती है तो यह उसकी सहमति में शामिल होता है। इसे बलात्कार कहना सही नहीं है। अदालत ने माना कि अगर पीड़िता से जबरदस्ती हो रही थी तो उसे आवाज उठानी चाहिए थी।
आरोपी को अग्रिम जमानत : रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज गुप्ता की अदालत ने दुष्कर्म के आरोपी विनय राठौर को अग्रिम जमानत दे दी है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पीड़िता कह रही है कि आरोपी सितंबर 2016 से उससे लगातार बलात्कार कर रहा है। लेकिन, ऐसा दस्तावेज या साक्ष्य अदालत में पेश नहीं किया गया, जिससे पता लगे कि उसने इसका विरोध किया हो। इससे पता चलता है कि पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के साथ होटल जाती रही। वहां दोनों के शारीरिक संबंध बने। उसने किसी को इस बारे में नहीं बताया कि आरोपी उसे धमकाकर संबंध बना रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि शादी का झांसा देकर बलात्कार के आरोप का चलन बढ़ गया है। जबकि ऐसे मामलों में खुद बालिग लड़की या युवती की अपनी भी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी बनती है।
शिक्षक पर आरोप : पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय पीड़िता आरोपी विनय राठौर के यहां ट्यूशन पढ़ने जाती थी। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई। आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए। पीड़िता का कहना था कि बाद में उसे पता चला कि वह शादीशुदा है। इसके बाद उसने पुलिस से आरोपी के खिलाफ शिकायत की।
दूसरे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई : आरोपी के वकील सत्यनारायण शर्मा ने अदालत में दलील पेश की कि पीड़िता ने मामला 10 मई 2018 को अमन विहार थाने में दर्ज कराया। वहीं, घटनास्थल को देखते हुए मामला बेगमपुर थाने में दर्ज कराया जाना चाहिए था। लेकिन पीड़िता ने वहां से महज डेढ़ से दो किलोमीटर दूर स्थित अमन विहार थाने में जीरो एफआईआर कराई।
बाद में मामला दूसरे थाने में भेजा दिया गया : बाद में प्राथमिकी बेगमपुर थाने में स्थानान्तरित कर दी गई। इसे लेकर बचाव पक्ष का अदालत में कहना था कि अमन विहार थाने में पीड़िता के परिचित पुलिसकर्मी हैं, इसलिए उसने ऐसा कदम उठाया गया। अदालत को इस पर गौर करना चाहिए।
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया गया। उस मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि मोहम्मद इकबाल बनाम दिल्ली राज्य में हाईकोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए कहा था कि किन्हीं दो लोगों को कितना करीब आना है या कितनी दूरी बनाए रखनी है यह उनका निर्णय है। अगर दोनों सहमति से संबंध बना रहे हैं तो उसे जबरदस्ती के दायरे में रखना सही नहीं है।
मोहम्मद इकबाल मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि पीड़िता को भी नैतिक और सामाजिक दायरे को ध्यान रखकर आगे बढ़ना चाहिए। अदालत का कहना था कि बालिग लड़की अपना भला-बुरा समझने की स्थिति में होती है। हर किसी के मन में शादी होने तक असमंजसता बनी रहती है कि शादी होगी या नहीं। ऐसे में खुद युवती या महिला को समझदारी से काम लेना चाहिए। इसी आधार पर अपने जीवन का फैसला लेना चाहिए। अदालत ने इस मामले में तर्क दिया है कि अगर पीड़िता से जबरदस्ती हो रही थी तो उसे आवाज उठानी चाहिए थी।
बता दें कि 2016 में दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए थे, इसके बाद उनमें दोस्ती हो गई। 26 वर्षीय पीड़िता आरोपी विनय राठौर के पास ट्यूशन पढ़ने जाती थी, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। 10 मई को पीड़ित युवती ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ अमन विहार थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी जिसपर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है।
