संसद सत्र पर भी दिखेगी गुजरात और हिमाचल की छाया

नई दिल्ली। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणाम का असर संसद के मौजूदा सत्र पर भी दिखेगा। पहले से आक्रामक रुख के संकेत दे रहा विपक्ष दोनों राज्यों में हार के बाद सरकार को सत्र में आने वाले ज्यादातर मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा। दूसरी ओर इस जीत ने सत्ता पक्ष में उत्साह का संचार तो किया है। लेकिन सरकार के सामने सदन चलाने की चुनौती भी है। ऐसे में विपक्ष को छेड़ने के बजाय उसका पूरा फोकस सदन के काम-काज को लेकर होगा।
सरकार की कोशिश होगी कि छोटे सत्र के बावजूद वह ऐसे सभी महत्वपूर्ण कामकाज को निपटा ले जो राजनीतिक लिहाज से उसके लिए आवश्यक और अहम हैं। इनमें तीन तलाक से संबंधित विधेयक शीर्ष पर है। सरकार की चेष्टा होगी कि इस विधेयक को हर हाल में संसद के इस सत्र से पारित करा लिया जाए। वैसे भी संसद सत्र शुरु होने से पहले ही सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए विपक्ष से भी सदन के काम-काज में सहयोग की अपील की थी।
लेकिन कांग्रेस ने सोमवार को सत्र की शुरुआत से ही इस बात के संकेत दे दिये थे कि सरकार के लिए सत्र चलाना आसान नहीं होगा। पार्टी ने पीएम की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निशाना बनाये जाने का मुद्दा उठाया। सत्र के शुरुआती दोनों दिन विपक्ष ने हंगामा करते हुए सदन को चलने नहीं दिया। विपक्ष इस दौरान पीएम से मणिशंकर अय्यर के घर हुई बैठक को लेकर सफाई मांगने पर अड़ा हुआ है।
चुनाव के दौरान भी यह बैठक एक बड़ा मुद्दा बन गया था। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रचार के दौरान हमला किया था। विपक्ष इसके अलावा भी जिन मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाते हुए दिख रही है, उसमें पाकिस्तान और डोकलाम मुद्दा भी शामिल होगा। फिलहाल इस सब के बीच भी यह देखना दिलचस्प होगा, कि विपक्ष इन दोनों राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद अपने मुद्दों को कितने आक्रामक तेवर और धैर्य के साथ टिक कर खड़ा रह पाता है।
