संस्थानों में हो रहा था शोषण, मलाला फंड ने अनुदान पर लगाई रोक

नई दिल्ली। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के ऑडिट रिपोर्ट के बाद मलाला फंड की ओर से सखी और नारी गुंजन नामक दो संस्थानों को दिए जाने वाले अनुदान को रोक दिया गया है। बता दें कि नोबल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई, मलाला फंड के जरिए हर लड़की को 12 साल तक मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दिशा में प्रयासरत हैं। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा किए गए सोशल ऑडिट में बिहार के तमाम शेल्टर होम्स में किसी न किसी तरह के यौन दुर्व्यवहार का मामला पाया गया। मलाला फंड के चीफ कम्युनिकेशन ऑफिसर टेलर रॉयल ने कहा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट में बाल शोषण के आरोपों के बाद दो संस्थानों सखी और नारी गुंजन को दिए जा रहे अनुदानों को मलाला फंड ने तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।’
रॉयल ने आगे बताया कि मलाला फंड की बाल संरक्षण नीति स्पष्ट रूप से बच्चों के किसी भी नुकसान या शोषण को प्रतिबंधित करती है जिस पर दोनों संस्थानों ने हस्ताक्षर किए थे। राज्य सरकार ने वर्ष 2017 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा ऑडिट कराया था और इसकी रिपोर्ट 2018 के अप्रैल में सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट को सौंपा गया। रिपोर्ट के अनुसार, सखी संस्थान में विशेषकर मानसिक तौर पर बीमार महिलाओं और लड़कियों को शारीरिक हिंसा का शिकार बनाया गया। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज रिपोर्ट में आगे तीन एजेंसियों पटना का नारी गुंजन, मधुबनी का रिवेक्श और कैमूर का ज्ञान भारती का जिक्र किया गया जो बदतर हालात में पाए गए। उन्होंने बताया कि लड़कियों के लिए मलाला और जियाउद्दीन युसुफजई ने 2013 में मलाला फंड की स्थापना की। हमारी प्राथमिकता की लिस्ट में अफगानिस्तान, ब्राजील, भारत, लेबनान, नाइजीरिया, पाकिस्तान और टर्की है।
