सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज में भाग लेगा भोपाल नगर निगम
भोपाल । भारत सरकार के केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी ”सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज 2021“ में नगर निगम भोपाल भी भाग लेने जा रहा है। यह कॉम्पिटिशन सैप्टिक टैंक, सीवेज और सीवेज मशीन होल से संबंधित है जिसमें इनकी सफाई पूरी तरह मशीनों से होगी। सीवेज कलेक्शन, ट्रांस्पोर्टेशन और प्रोसेसिंग में भी पूरी मशीनों का ही उपयोग होगा। केन्द्रीय आवासन मंत्रालय ने इस प्रतिस्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों के लिए 12 करोड़ रूपए का प्रथम पुरस्कार रखा है जबकि द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमश: 06 करोड एवं 03 करोड रुपये की राशि दी जाएगी।
नगर निगम आयुक्त के.वी.एस. चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि केन्द्रीय आवासन मंत्रालय ने सफाई मित्र सुरक्षा चेलेंज 2021 की लांचिंग कर दी गई है और नगर निगम भोपाल पहले से ही इस चैलेंज के लिए तैयार है। सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज 2021 की गाईड लाईन के मुताबिक हर शहर को सैप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों का ही उपयोग करना है। इसके अलावा श्रम कानून और सुप्रीम कोर्ट की गाईड लाईन के मुताबिक मेला ढ़ोने की प्रथा पूरी तरह प्रतिबंधित है। राजधानी में पूरी तरह से यह प्रथा खत्म हो चुकी है। इसके अलावा करीब 23 लाख की आबादी पर पहले 4 मशीनों से ही काम लिया जाता था, लेकिन अब मशीनों की संख्या भी करीब 39 हो चुकी है।
क्या है सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज
केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ”सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज“ लांच किया इसमें नगर निगम भोपाल भी भाग लेने जा रहा है। प्रतिस्पर्धा के तहत निगम सीवेज से जुड़े सभी कार्य मशीनों से ही करेगा। इसके अलावा सीवेज कलेक्शन, ट्रांस्पोर्टेशन और प्रोसेसिंग में भी पूरी मशीनों का ही उपयोग होगा। आगामी 31 मार्च 2021 तक तैयारियां पूरी कर अप्रैल 2021 में डाक्यूमेंटस जमा होंगे, फिर मई से जून के बीच इसका सर्वे होगा और 15 अगस्त को इस प्रतिस्पर्धा का रिजल्ट घोषित होगा। केन्द्रीय आवासन मंत्रालय ने इस प्रतिस्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों के लिए 12 करोड़ रूपए का प्रथम पुरस्कार रखा है जबकि द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमश: 06 करोड एवं 03 करोड रुपये की राशि दी जाएगी।
मैला ढ़ोने की प्रथा खत्म करने बन चुका है कानून
मैला ढ़ोने की प्रथा को समाप्त करने का पहला कानून देश में 1993 में पारित हुआ था और फिर 2013 में इससे संबंधित दूसरा कानून अधिनियमित हुआ। पहले कानून में केवल सूखे शौचालयों में काम करने को समाप्त किया गया जबकि दूसरे कानून में मैला ढ़ोने की परिभाषा को बढ़ाया गया, जिसमें सेप्टिक टैंकों की सफाई और रेलवे पटरियों की सफाई को भी शामिल किया गया। इस कानून ने स्पष्ट तौर पर मैला ढोने वाले या इसके संपर्क में आने वाले श्रमिकों की संख्या को बढ़ाया है। 27 मार्च 2014 को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय आया जिसमें सीवर श्रमिकों के मुद्दे को भी शामिल किया गया क्योंकि उन्हें भी बहुत मुश्किल परिस्थितियों में बिना किसी सुरक्षात्मक आवरण के सीवर लाइनों की सफाई करते हुए मानव मल को साफ करना पड़ता था।
अब पूर्णत: मशीनीकृत तरीके से किया जाता है सैप्टिक टैंक खाली
नगर निगम द्वारा शहर में पूर्णत: मशीनीकृत तरीके से सैप्टिक टैंकों को खाली करने के साथ ही सभी सुरक्षा मापदण्डों के आधार पर स्लज का परिवहन किया जाकर शहर के 07 अलग-अलग सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में डाला जाता है। निगम द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर 03 नये सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट आगामी दिसम्बर माह में प्रारंभ किए जायेंगे। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटो में प्रोसेसिंग के उपरांत निकलने वाला स्लज कम्पोस्ट का उपयोग उद्यानिकी कार्यों एवं रीयूज वॉटर का उपयोग सेंट्रल वर्ज आदि में सिंचाई के लिए तथा निर्माण कार्यों व धुलाई हेतु कच्चे पानी के रूप में किया जाता है।
