सीवरेज में हुई सफाईकर्मी की मौत तो निगम कमिश्नर पर होगा केस, पंजाब में अब तक 40 ने गंवाई जान

सीवरेज सफाई के दौरान अगर अब किसी सफाई कर्मी की मौत होती है तो संबंधित नगर निगम के कमिश्नर या नगर काउंसिल के एग्जीक्यूटिव अफसर के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। सफाई कर्मचारियों के राष्ट्रीय आयोग ने पंजाब सरकार को यह निर्देश दिए हैं।आयोग के चेयरपर्सन मनहर वलजीभाई जाला और मेंबर मंजू दिलेर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब तक पंजाब में चालीस सफाईकर्मियों की मौत सीवरेज में सफाई के दौरान हुई है। जिनमें से चार मौतें हाल ही में कुराली, जालंधर, बरनाला आदि शहरों में हुई हैं। 

पर इन मामलों में कानून के मुताबिक कार्रवाई नहीं हुई। डीजीपी ने बताया कि सिर्फ तीन मामलों में एफआईआर हुई है। उसमें भी आईपीसी की धारा 304-ए लगाई गई, लगनी 304-बी थी, आरोपियों को जमानत मिल गई। इनमें एमएस एक्ट और एससी एक्ट की धाराएं भी नहीं लगाई गईं। केस भी कॉन्ट्रैक्टर आदि पर दर्ज किए गए। 

 

मुख्य सचिव से कहा गया है कि इन मामलों में प्रिंसिपल इंप्लायर यानि निगम कमिश्नर या ईओ के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। आठ परिवारों को अब तक दस लाख का मुआवजा भी नहीं मिला है। पंजाब सरकार ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता था कि पीड़ित परिवार से एक सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। सीएस से कहा गया है कि मशीनों से सफाई करवाएं, उन्हें छह माह में सारा काम मैकेनाइज्ड करने का भरोसा दिया है। उन्हें पीड़ित परिवारों को नौकरी का सारा ब्येरा फाइनल कर एक माह में रिपोर्ट देने को कहा गया है।

अभी भी सिर पर मैला ढोना जारी
चेयरपर्सन जाला ने बताया कि पंजाब सरकार कई साल पहले लिख कर दे चुकी है कि यहां सिर पर मैला नहीं ढोया जाता। लेकिन केंद्र सरकार को कुछ राज्यों का फीडबैक मिला है, जहां अभी भी सिर पर मैला ढोने की प्रथा जारी है। इसमें पंजाब के चार शहर जालंधर, लुधियाना, संगरूर और फतेहगढ़ साहिब हैं। पंजाब सरकार को कहा गया है कि यहां दोबारा सर्वे कराया जाए। इसी तरह यूपी के 47, बिहार के 14, उत्तराखंड के दो शहरों के बारे में फीडबैक मिला है।

न्यूनतम वेतन मिलेगा

चेयरपर्सन जाला ने बताया कि सफाईकर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं के लिहाज से पंजाब सबसे पीछे है। सरकार से कहा गया है कि हरेक सफाईकर्मी को नौकरी नहीं दे सकते तो चंडीगढ़ और हरियाणा की तरह 15 हजार प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय किया जाए। ठेकेदारों के हाथों शोषण बंद कराया जाए।

 पीएम आवास योजना के तहत मकान और मेडिकल व अन्य भत्ते दिए जाएं। उन्होंने बताया कि सफाईकर्मियों का ईपीएफ काट कर पता नहीं कहां जमा कराया जा रहा है, सरकार अपना तो दे ही नहीं रही है। पार्ट टाइम कर्मचारी न रखने की कड़ी हिदायत दी गई है। सरकार को राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के पदाधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

फीडबैक लेने के बाद की रिव्यू मीटिंग
आयोग ने पहले सफाई कर्मचारियों की विभिन्न यूनियनों, कैबिनेट मंत्री चरनजीत चन्नी समेत कई विधायकों से सफाई कर्मियों की समस्याओं पर फीडबैक लिया। उसके बाद रिव्यू मीटिंग की जिसमें मुख्य सचिव करन अवतार सिंह समेत कई विभागों के आला अधिकारी शामिल थे। लोगों ने मांग की कि सफाई कर्मियों के बच्चों को एमए तक मुफ्त शिक्षा दी जाए और एससी स्कॉलरशिप की सौ फीसदी राशि केंद्र सरकार दे।

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