सैकडों वन्यप्राणियों को वनविहार में मिला पुनर्जीवन

भोपाल । राजधानी के वनविहार में अब तक सैकडों वन्यप्राणियों को पुनर्जीवन मिल चुका है। यहां बीते 30-35 सालों में साल में गंभीर रुपए घायल होकर आए एक हजार से ज्यादा वन्यप्राणियों का उपचार कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया गया। इनमें बाघ, सिंह, तेंदुए, भालू, नीलगाय, हिरण, सांभर समेत सभी प्रकार के वन्यप्राणी शामिल है। ये वन्यप्राणी प्रदेश के टाइगर रिजर्व और सामान्य वन क्षेत्रों में घायल मिले थे। जिन्हें पार्क लाकर उपचार किया गया। इनमें से 99 फीसद वन्यप्राणी ठीक हुए। कुछ को पार्क में रखा गया और कुछ को पूरी तरह स्वस्थ्य होने के बाद जंगलों में छोड़ा गया है। बीते एक साल में दो बाघ, दो तेंदुए और एक भालू को इलाज के बाद खुले जंगल में छोड़ा गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में पार्क में 13 बाघ है, जो बाड़े में रखे जा रहे हैं। दो को डिस्प्ले में रखा गया है। 5 सिंह हैं इनमें से दो को डिस्प्ले बाड़े में रखा है, जहां पर्यटक देख सकते हैं। 11 तेंदुए हैं इनमें से एक को डिस्प्ले में रखा जा रहा है, बाकी बाड़े में रखे जा रहे हैं। 21 भालू है इनमें से तीन को डिस्प्ले में रखा जा रहा है बाकी अंदर वाले बाड़े में है। 10 बारहसिंगा है जो हार्ड ग्राउंड प्रजाति के हैं। इनमें से सात खुले में विचरण करते हैं बाकी बाड़े में रखे जा रहे हैं। 550 से अधिक हिरण, 480 सांभर, 65 नीलगाय, 12 मगरमच्छ व 3 घड़ियाल है। पार्क के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर आरके दीक्षित बताते हैं कि वन विहार नेशनल पार्क 26 जनवरी 1983 को बना। 24 नवंबर 1994 को चिड़ियाघर के रूप में मान्यता मिली। अभी तक पार्क में सभी तरह के वन्यप्राणियों को मिलाकर हजारों का उपचार किया जा चुका है। प्रदेश के अंदर वन विहार नेशनल पार्क से बेहतर वन्यप्राणियों का और कहीं इलाज नहीं हो रहा है। पार्क के अंदर प्राथमिक इलाज से लेकर ऑपरेशन करने तक की सुविधा है। यह मप्र के लिए बड़ी सौगात है।बता दें कि वन विहार नेशनल पार्क के पास शुरु से ही अनुभवी वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम रही है जो जरुरत पड़ने पर प्रदेश के सामान्य जंगल व रिजर्व में जाकर दर्जनों वन्यप्राणियों का उपचार करती आई है।
