सोज के पुस्तक विमोचन में नहीं पहुंचे मनमोहन-चिदंबरम, कश्मीर की आजादी पर दिया था विवादित बयान

नई दिल्ली कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज की किताब ‘कश्मीर: ग्लिम्पसेज ऑफ हिस्ट्री एंड द स्टोरी ऑफ स्ट्रगल’ के विमोचन से कांग्रेस के सीनियर नेता ने दूरी बनाई।

'आजाद कश्मीर' वाले बयान के बाद से बीते तीन दिनों से विवादों में चल रहे सैफुद्दीन सोज से कांग्रेस नेताओं ने दूरी बनाई है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम नदारद रहे तो वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इवेंट में शामिल नहीं हुए। पहले कहा जा रहा था कि वह एक दर्शक के तौर पर इसमें शामिल हो सकते हैं। जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश विमोचन में शामिल तो हुए लेकिन वह दर्शक के रूप में पहले माना जा रहा था कि उन्हें पैनलिस्ट के तौर पर इसमें शिरकत करेंगे।


बता दें कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पी. चिदंबरम, मनमोहन सिंह और गुलाम नबी आजाद के अलावा कई बड़े कांग्रेसी नेताओं को न्यौता दिया गया था। 



इससे पहले, कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सैफुद्दीन सोज की तरफ से भेजे गए न्यौते को मनमोहन सिंह ने स्वीकार कर लिया था। लेकिन उन्होंने विवाद को देखते हुए कार्यक्रम में जाने से पहले ही मना कर दिया था।


उल्लेखनीय है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के एक दशक पहले दिये बयान को सही बताते हुए कहा था कि कश्मीरी आजादी चाहते हैं। 


उन्होंने कहा, 'मुशर्रफ का कहना था कि कश्मीरी पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहते उनकी पहली पसंद आजादी है। यह बयान तब भी सही था और अब भी सही है। मैंने भी यही बात कही है लेकिन मुझे मालूम है कि ऐसा नहीं हो सकता है।' साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया था  कि उनके इस बयान से कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं है। 

 

भाजपा-पीडीपी गठबंधन उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव का मेल जैसा था : सोज

अपनी इस किताब के माध्यम से सोज ने यह खुलासा किया है कि सरदार पटेल हैदराबाद के बदले कश्मीर को पाकिस्तान को देने की पेशकश की थी लेकिन नेहरू को कश्मीर से विशेष लगाव था। लिहाजा कश्मीर बच गया और इस बात के सबूत हैं। इसके बाद सरकारी एजेंसी के साक्षात्कार में सोज से जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात और कश्मीर में भाजपा-पीडी गठबंधन टूटने पर उनकी राय जानने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि शुरू से ही यह गठबंधन सही नहीं था। यह गठबंधन उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के मेल से कम नहीं था। मुफ्ती मोहम्मद सईद ने एक प्रयोग किया, जो कल भी नाकाम था और आज भी नाकाम है।


इस सवाल पर कि आखिर भाजपा ने इस गठबंधन अचानक नाता क्यों तोड़ लिया, सोज ने कहा कि भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनाना है और इसलिए वे अलग हुए हैं। आप देखेंगे कि वे लोग चुनाव के समय कहेंगे कि हमने देश के लिए यह गठबंधन तोड़ा। सच्चाई यह है कि इन्होंने देश के लिए यह फैसला नहीं किया है बल्कि अपनी साख बचाने के लिए किया है। अब वो जम्मू में सांप्रदायिकता को हवा देंगे। घाटी में पीडीपी के भविष्य के सवाल पर संप्रग सरकार के पूर्व मंत्री ने कहा कि पीडीपी से लोग बहुत नाराज हैं। जनादेश किसी को भी नहीं मिला था। लिहाजा पीडीपी ने गठबंधन करके बहुल गलत किया था। मुझे पता नहीं कि आगे क्या होगा। लेकिन इस वक्त पीडीपी बहुत अलोकप्रिय हो चुकी है। 


उन्होंने यह भी कहा कि जब तक भारत सरकार की नीति नहीं बदलती है तब कि घाटी में कुछ नहीं होने वाला है। राज्य सरकार के पास करने के लिए कुछ नहीं है। इस वक्त केंद्र सरकार की नीति गलत है। अब वह ज्यादा फौजी को भेजेंगे, ज्यादा सीआरपीएफ आएगी। बल प्रयोग करने की नीति अपनाई जाएगी। इस नीति से लोग मर सकते हैं लेकिन कोई हल नहीं निकलेगा और न ही कोई रास्ता। 


सैफुद्दीन सोज से जब यह पूछा गया कि क्या जम्मू-कश्मीर में नए राज्यपाल बदलने की जरूरत है या नए राज्यपाल नियुक्त किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस पर उनका जवाब था कि मैं तो सिर्फ इतना कहूंगा कि एनएन वोहरा को कश्मीर की पहचान है। वो गलत काम नहीं करेंगे और जब तक वह रहेंगे, कश्मीर में अच्छी सरकार ही देंगे। वह सूझबूझ वाले इंसान हैं। मुझे नहीं पता कि भारत सरकार उनको कब तक इस पद पर रखेगी। 

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