सोनिया के साथ मीटिंग में हुड्डा ने की खुद को सीएम कैंडिडेट बनाने की मांग

सूत्रों के मुताबिक हुड्डा जहां खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कराने पर अड़े हैं और अपने नेतृत्व में ही विधानसभा चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं, वहीं अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा के लिए भी वे संगठन में पद चाहते हैं.
हरियाणा विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खुद को सीएम कैंडिडेट घोषित करने की मांग कांग्रेस हाईकमान से की है. सूत्रों के मुताबिक हुड्डा जहां खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कराने पर अड़े हैं और अपने नेतृत्व में ही विधानसभा चुनाव लड़ने की मांग कर रहे हैं, वहीं अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा के लिए भी वे संगठन में पद चाहते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हालांकि इसपर अभी कोई फैसला नहीं लिया है.
चुनाव की तैयारी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास दस जनपथ पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई. इसमें प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद, भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित तमाम पार्टी नेता शामिल हुए. हरियाणा में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर लगातार पसोपेश का दौर चल रहा है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अशोक तंवर के बीच खींचतान जारी है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाल ही में रोहतक में महापरिवर्तन रैली करके कांग्रेस हाई कमान को अपनी सियासी ताकत से वाकिफ कराया था. उन्होंने रैली से साफ संकेत दे दिया है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से अशोक तंवर को हटाया जाए और आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें अहम भूमिका सौंपी जाए. हुड्डा की शर्तों को लेकर कांग्रेस हाईकमान कश्मकश में है.
दरअसल हरियाणा के मौजूदा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को राहुल गांधी ने नियुक्त किया था. ऐसे में अगर तंवर को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाता है तो यह संदेश जाएगा कि सोनिया गांधी के राज में राहुल के करीबियों को तवज्जो नहीं मिल रही है. सोनिया गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती टीम राहुल को नाराज किए बगैर हरियाणा की रस्साकशी को खत्म करने की है.
कांग्रेस आलाकमान प्रदेशाध्यक्ष को बदलने पर फैसला ले सकता है. यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेशाध्यक्ष पद पर अशोक तंवर की जगह कुमारी शैलजा को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है. हालांकि अशोक तंवर साफ कह रहे हैं कि हरियाणा कांग्रेस में कोई बदलाव नहीं होगा. नेतृत्व परिवर्तन की अभी कोई चर्चा नहीं है. तंवर ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा पिछले पांच साल से चल रही है, जिसको रोना है वो रोता रहे.
कांग्रेस के आपसी विवाद की वजह से विधानसभा चुनाव की रेस में पार्टी पीछे नजर आ रही है. अभी तक कांग्रेस की कोई तैयारी नहीं दिख रही है, जबकि भाजपा तेजी से प्रचार अभियान चलाए हुए है.
