हरियाणा विस चुनावः भाजपा से टिकट के दावेदारों का योगेश्वर दत्त ने बिगाड़ा गणित, कई के लिए टेंशन

ओलंपिक मेडलिस्ट पहलवान योगेश्वर दत्त के भाजपा में आने से टिकट के दावेदारों का गणित बिगड़ता दिख रहा है। क्योंकि योगेश्वर दत्त का डीएसपी के पद से इस्तीफा दिलवाने से यह तय है कि उनको गोहाना व बरोदा में कोई एक सीट से चुनाव जरूर लड़ाया जाएगा। जिससे गोहाना व बरोदा से चुनाव के लिए लाइन में लगने वाले नेताओं की परेशानी बढ़ गई है तो टिकट के लिए तय किए गए जातिगत संतुलन से अन्य सीटों पर भी नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है।
हालांकि योगेश्वर के आने के बाद भाजपा से दो प्रत्याशी साफ हो गए हैं और अब केवल चार सीटों पर प्रत्याशियों के नाम साफ होने बाकी हैं। जिससे उन चार सीटों पर नेताओं की धड़कन बढ़ी हुई है। भाजपा से सोनीपत सीट से मंत्री कविता जैन व उनके पति राजीव जैन में किसी एक को टिकट मिलना तय है और यह फैसला हाईकमान को लेना है कि वह इनमें से किसे चुनाव मैदान में उतारते हैं।
खरखौदा सीट अनुसूचित जाति के कोटे में आती है तो वह भी भाजपा के जातिगत संतुलन के दायरे से बाहर है, क्योंकि वहां अनुसूचित जाति का प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। जबकि भाजपा ने राई, गन्नौर, गोहाना, बरोदा के लिए दो जाट, एक पिछड़ा वर्ग, एक ब्राह्मण का संतुलन बनाकर प्रत्याशी उतारने की तैयारी की हुई थी। जिनमें से योगेश्वर दत्त ब्राह्मण होने के कारण कई नेताओं को झटका लगता दिख रहा है, क्योंकि टिकट के लिए बनाए गए जातिगत संतुलन में ब्राह्मण का कोटा भी फिलहाल खत्म हो गया है।
बरोदा व गोहाना में टिकट की लाइन में लगे नेताओं को भी झटका लगा है, जिसका सबसे बड़ा कारण है कि योगेश्वर दत्त को बरोदा व गोहाना में किसी एक सीट से उतारा जाएगा तो ऐसे में केवल एक सीट ही बचेगी। उस सीट पर भी पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशी को उतारने की तैयारी भाजपा कर रही है। ऐसे में गन्नौर व राई सीट बाकी रह जाती है और अब जातिगत आधार पर टिकट दिए जाते हैं तो इन सीटों पर जाट प्रत्याशियों को उतारा जा सकता है।
हालांकि यह भी माना जा रहा है कि भाजपा हाईकमान टिकट वितरण में जातिगत संतुलन को बदल सकता है। लेकिन यह उस स्थिति में होगा, जब हाईकमान को यह लगेगा कि पहले तय किए गए जातिगत संतुलन से किसी सीट पर ऐसा प्रत्याशी नहीं है जो चुनाव जीत सके। उस स्थिति में ऐसे प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है जो भाजपा की जीत को तय करे, वह चाहे किसी अन्य बिरादरी का प्रत्याशी हो।
