10 दिन से चल रही थी ओम को लोकसभा स्पीकर बनाने की तैयारी, भाई से कहा था- होने वाला है बड़ा फैसला

कोटा। पिछले एक दशक से वसुंधरा राजे के विरोधी माने जाने वाले कोटा-बूंदी सांसद ओम बिड़ला को मोदी-शाह की जोड़ी ने लोकसभा स्पीकर चुन लिए गए हैं। बिड़ला की एक खूबी ये भी है कि उनके दिल्ली भाजपा में बड़े नेताओं से अच्छे रिश्ते हैं। इससे पहले बलराम जाखड़ लोकसभा सन 1980 से 1989 तक स्पीकर रह चुके हैं। 1980 में वे पंजाब के फिरोजपुर व 1984 में सीकर से सांसद थे। लगातार दूसरी बार सांसद बने बिड़ला इससे पहले 3 बार (2003, 2008 व 2013) कोटा से विधायक रह चुके हैं। 2004 से 2008 के बीच वे राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव भी रहे हैं। छात्र जीवन से राजनीति की शुरुआत करने वाले बिड़ला नेहरू युवा केंद्र व कोल इंडिया में निदेशक रहे। राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ के अध्यक्ष, राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ के उपाध्यक्ष, युवा मोर्चा में कोटा के 4 साल तक जिलाध्यक्ष, 6 वर्ष तक राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष, 6 वर्ष तक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। बिड़ला गरीबों को फ्री कपड़े मुहैया कराने के लिए निशुल्क परिधान उपहार केंद्र, प्रसादम, मेडिसिन बैंक, गरीब बच्चों के लिए मेरी पाठशाला जैसे कई सामाजिक सरोकारों से जुड़े हैं। बिड़ला को करीब 10 दिन पहले ही पता लग गया था कि उनका नाम लोकसभा स्पीकर के लिए तय किया जा रहा है। लेकिन उन्होंने इसकी किसी को भनक तक नहीं लगने दी। उनके परिवार व स्टाफ में भी एक-दो लोगों को ही यह जानकारी इस हिदायत के साथ दी गई थी कि वे कहीं भी इसकी चर्चा नहीं करें।असल में बिड़ला के दिल्ली में संपर्क तब से है, जब वे युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे। उस वक्त मप्र के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान राष्ट्रीय अध्यक्ष हुआ करते थे। जेपी नड्डा, राजीव प्रताप रूडी, भूपेंद्र यादव समेत भाजपा में आज के कई दिग्गज उनके पुराने साथी रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन्हीं नेताओं की बिड़ला को यहां तक पहुंचाने में अहम भूमिका रही है। इस पूरे मामले की गोपनीयता का आलम यह था कि दो दिन पहले बिड़ला के बड़े भाई राजेश कृष्ण बिड़ला अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ पुलिसकर्मी द्वारा अभद्रता करने पर बिफर गए थे और वे पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंच गए थे। इसी दौरान ओम बिड़ला ने उन्हें फोन किया और कहा कि अभी शांत रहिए, बड़ा फैसला होने वाला है। इसके बाद राजेश बिड़ला चुपचाप वापस आ गए। बिड़ला के पिता श्रीकृष्ण बिड़ला सेल्स टैक्स में कार्यालय अधीक्षक पद से रिटायर हैं। 90 वर्षीय पिता को बेटे के स्पीकर बनने की जानकारी सुबह करीब 7 बजे अपने दामाद से मिली। बोले-एक पिता के नाते मेरे लिए इससे बड़ी खुशी की बात क्या हो सकती है? सामान्य परिवार का लड़का लोकसभा स्पीकर बनने जा रहा है। मेरे सभी बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़े-लिखे, सभी को आगे बढऩे के भरपूर अवसर दिए। बेटों को संस्कारित बनाने में इनकी दिवंगत मां शकुन्तला का विशेष योगदान रहा। ओम किसी भी चुनाव में जाने से पहले मेरे पैर छूता है और मां की तस्वीर के सामने नमन करता है। मैं चाहूंगा कि वह कोटा का विकास कराएं, उद्योगों पर ध्यान दें। पिता के अनुसार एक बार जरूर उसने सिनेमा जाने की जिद पकड़ ली। उस वक्त वह शायद 3 साल का होगा, लेकिन वह बचपन में शरारती नहीं था। पत्नी बोलीं-मुझे तो ओम जी ने सुबह ही बताया कि नॉमिनेशन भरने जा रहा हूं बिड़ला की पत्नी डॉ. अमित बिड़ला गायनी सर्जन हैं और वर्तमान में दिल्ली में ही बीकानेर हाउस डिस्पेंसरी में पोस्टेड है। भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुझे तो ओमजी ने सुबह करीब साढ़े 8 बजे बताया कि नॉमिनेशन भरने जा रहा हूं, एकबारगी मैं खुद चौंक गई। यह बड़े गर्व का क्षण है, मुझे बहुत खुशी है, भगवान की कृपा है। मुझे पूरी उम्मीद है कि वे सदन को अच्छे तरीके से चलाएंगे। मेरी दोनों बेटियां आकांक्षा और अंजलि भी हैरान रह गईं। बिड़ला की कहानी भी पीएम नरेंद्र मोदी की तरह चाय से ही जुड़ी है। उनकी इस कहानी से पर्दा भी सबसे बड़े भाई राजेश कृष्ण बिड़ला ने ही उठाया। उनके मुताबिक, 70 के दशक में मैं राजनीति में सक्रिय था। ओम उस वक्त काफी छोटा था। जब कोई भी नेता मेरे से मिलने घर आता तो ओम को शौक था कि वह खुद उन्हें चाय सर्व करता था। उसके इस शौक को देखकर मुझे लगने लगा था कि इसकी राजनीति में आने की इच्छा है। वह नेताओं के भाषण की नकल भी करता था। यह सब देखकर मैंने ओम को राजनीति में आगे बढ़ाने की ठानी। 1977 में जब वह मल्टीपरपज स्कूल का प्रेसीडेंट बना तो उसने पहला सार्वजनिक भाषण गवर्नमेंट कॉलेज में दिया।
