परिवार में सभी सदस्यों की सेहत के साथ अपने खानपान का भी ख्याल रखें

नैना (परिवर्तित नाम) को बार बार बुखार आ रहा था और हाथ-पैर बहुत दर्द कर रहे थे। बहुत से डॉक्टर को दिखाया, कई तरह की जांचें भी कराईं मलेरिया-टाइफाइड आदि। सारी रिपोर्ट नॉर्मल आने के बाद भी बुखार नहीं जा रहा था। काफी पैसे खर्च होने के बाद अंत में परेशान होकर उसने इलाज कराना बंद कर दिया। कुछ महीनों बाद फिर परेशान हुई, डॉक्टर बदलती और पैसे खर्च करती रही, लेकिन आराम नहीं मिल पाया, क्या कारण है? आमतौर पर महिलाओं में देखा गया है कि किसी की कमर में दर्द होता है, किसी के पैर दुखते हैं, शरीर में झुनझुनी आना व सुन्न होना, ब्लड प्रेशर का बार-बार कम होना पाया गया है। महिलाएं अपने शरीर के लिए कभी भी जागरूक नहीं रहती हैं।

घर में पति और बच्चों का ध्यान रखती हैं, लेकिन अपनी सेहत पर कभी ध्यान नहीं देती हैं। सुबह से भूख लगती है, लेकिन नहाने और पूजा करने के बाद सारे काम खत्म करके खाना खाती हैं। तब तक भूख मर जाती है, इसलिए आराम करने लगती हैं। खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से गैस की शिकायत होने लगती है। क्योंकि खाना पचता ही नहीं है। यही हाल रात में भी रहता है। सारा काम निपटाकर आखिरी में खाना खाती हैं और फिर लेट जाती हैं। सबको पता है कि बीमारी की शुरुआत पेट से ही होती है, इसके बाद भी ध्यान नहीं देते हैं।

गैस की वजह से नहीं लगती है भूख

गैस बनने की वजह से पेट हमेशा भारी रहता है और यह हमारी भूख के अहसास को खत्म करता है। जब हम खाना नहीं खाते हैं तो धीरे-धीरे कमजोरी बढ़ने लगती है। पानी का तो हम कभी ध्यान ही नहीं देते, सिर्फ खाने के साथ पानी पीते हैं, वह भी 1 से 2 लीटर तक नहीं होता है।सभी सब्जियों को काटने के बाद उनके छिलके फेंक देती हैं। आटे को छानकर उसका बचा आटा बुरादा फेंक देते हैं। इस आटे में फाइबर पाया जाता है। खाने में सलाद बहुत कम लेती हैं।

दूध- दही और फलों का भी नियमित सेवन नहीं करती हैं। लेकिन बच्चों को भरपूर खिलाया जाता है। पानी की कमी, फाइबर की कमी, समय पर खाना नहीं खाने और दूध-दही का सेवन नहीं करने से कब्जियत होने लगती है। जिसके कारण गैस से पेट फूला रहता है। महिलाएं समय पर खाना खाएं और थोड़ा टहलने के बाद आराम करें।

लापरवाही बिल्कुल न करें

डिलीवरी होने या बार-बार गर्भपात होने के कारण महिलाओं के शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। इस कमी के चलते उनकी कमर और पैरों में अक्सर दर्द होने की शिकायत रहती है। इसके अलावा हाथों में झुनझुनाहट होने लगती है।इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ ही महिलाओं के शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है, जिसके कारण भी हाथ-पांव में दर्द रहता है। खास तौर पर रात में सोते समय पैरों में खिंचाव होने लगता है। झुक कर काम करने पर कमर में दर्द का अहसास होता है, जिसे महिलाएं हड्डी का बुखार कहती हैं। फिर वे डॉक्टर के पास जाकर बुखार की तकलीफ बताती हैं।

महिलाओं के खाने में पौष्टिक तत्वों की कमी होना, पानी कम मात्रा में पीना, कब्जियत या पेट का साफ नहीं होना, बार-बार गर्भधारण होना या डिलीवरी होने की वजह से महिलाओं में कमजोरी बढ़ती चली जाती है और वे समझती हैं कि यह सब बुखार की वजह से हो रहा है।महिलाओं को एक बात ध्यान रखना चाहिए कि स्वस्थ रहने के लिए समय पर खाना खाएं, पौष्टिक खाना लें, रोजाना 4 से 5 लीटर पानी पीएं। अगर पेट साफ नहीं हो पाता है तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। हो सके तो रोज आधे घंटे व्यायाम करना चाहिए और कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद पूरी होनी चाहिए। साथ ही खाने में फाइबर्स को बढ़ाएं, ऐसा करने से आप शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगी।

 

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