दुनिया का तीसरा सबसे भरोसेमंद देश भारत, लेकिन यहां पाक-चीन से पिछड़ा

दावोस। सरकार, कारोबार, एनजीओ और मीडिया के मामले में भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद देशों में शामिल है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले यहां लोगों का भरोसा डिगा है। एडलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक से ठीक पहले आए इस सर्वेक्षण के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर उपरोक्त चार मानकों को लेकर लोगों का भरोसा काफी हद तक पिछले साल जैसा ही है। सर्वेक्षण में शामिल 28 देशों में से 20 देश गैर भरोसेमंद की श्रेणी में रखे गए हैं। 2017 में इस श्रेणी में 19 देश थे।
सर्वेक्षण में दो वर्गों में रैंकिंग दी गई। एक में संबंधित मानकों से जुड़े हुए लोगों से राय ली गई और दूसरे में आम जनता से राय पूछी गई। दोनों वर्गो में क्रमश: 83 और 74 अंक के साथ चीन पहले स्थान पर रहा। वहीं 77 और 68 अंकों के साथ भारत का स्थान तीसरा रहा। इंडोनेशिया सूची में दूसरे स्थान पर रहा।
सूची 28 देशों के 33,000 से ज्यादा लोगों पर किए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की गई। भरोसे के मामले में चीन, भारत, यूएई, इंडोनेशिया और सिंगापुर की स्थिति कमोबेश एक जैसी है। हालांकि, भारत पिछले साल के मुकाबले भरोसा गंवाने वाले देशों में छठे नंबर पर रहा। पश्चिम के अधिकतर देश गैर भरोसेमंद की श्रेणी में हैं।
सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि पहली बार मीडिया सबसे कम भरोसे वाला संस्थान रहा। 28 में से 22 देशों में लोगों ने इसे गैर भरोसेमंद की श्रेणी में रखा। इसके अलावा, ऐसी कंपनियां जिनके हेडक्वार्टर कनाडा, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया में हैं, उन पर लोगों ने सबसे ज्यादा भरोसा दिखाया।
समावेशी विकास के मामले में तमाम उभरते देशों में भारत को 62वां स्थान मिला है। इस सूचकांक में चीन और पाकिस्तान को भारत से अच्छी रेटिंग दी गई है। चीन 26वें और पाकिस्तान 47वें स्थान पर है। पिछले साल भारत 60वें, चीन 15वें और पाकिस्तान 52वें स्थान पर रहा था। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के सालाना सूचकांक के मुताबिक, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में समावेशी विकास के मामले में सबसे ऊपर नार्वे को जगह मिली है। वहीं, उभरती अर्थव्यवस्थाओं में लिथुआनिया एक बार फिर टॉप पर रहा। इस सूचकांक में जीवन स्तर, पर्यावरण अनुकूलता और अगली पीढ़ी को कर्ज से बचाने जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाता है। डब्ल्यूईएफ ने विभिन्न राष्ट्रों से समावेशी विकास के लिए जल्द से जल्द नए मॉडल अपनाने की अपील की है।
