SC ने पर्यावरण उल्लंघन मामले में रद्द किए गोवा के 88 खदानों के लाइसेंस

नई दिल्‍ली। गोवा में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 80 से अधिक खदानों के लाइसेंस रद्द कर दिए। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आदेश दिया कि अब नई नीति के तहत खदानों का आवंटन होगा। इसके लिए नई खदानों को फिर से पर्यावरणीय मंजूरी लेनी होगी।


गोवा सरकार ने 2015 में कंपनियों को 20 साल के लिए खदान के लाइसेंस दिए थे। ये लाइसेंस पिछली तिथि से प्रभावी थे।


कोर्ट ने नियमों का उल्लंघन कर की गई माइनिंग की एसआईटी जांच में तेजी लाने और रिकवरी किए जाने के भी आदेश दिए हैं। कोर्ट के आदेशानुसार कंपनियों को 16 मार्च तक कामकाज समेटना होगा। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को नीलामी के ज़रिये नए सिरे से खदान लाइसेंस देने को कहा है। राज्य की सभी 88 माइनिंग लीज़ को रद कर दिया है।


गोवा फाउंडेशन ने दायर की थी याचिका – 


इस मामले में गोवा फाउंडेशन ने याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन खनन कंपनियों पर रोक लगाते हुए आदेश दिया कि सरकार की तरफ से लीज 16 मार्च तक के लिए आवंटित की गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि गोवा में माइनिंग लीज़ के लिए सरकार नए सिरे से नीलामी करवाए। आरोप है कि गोवा की तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार ने 88 ख्‍दानों के लीज गलत तरीके से कुछ लोगों के लाभ के लिए आवंटित किया था। इस मामले में गोवा सरकार का कहना है कि सभी निश्चित प्रक्रियाओं का लीज आवंटन में पालन किया गया है।


राजनीतिक मुद्दा रहा है गोवा में खनन घोटाला – 


गोवा में खनन घोटाला एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है और इसमें कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री दिगम्बर कामत से भी एसआईटी पूछताछ हो चुकी है। उल्‍लेखनीय है कि केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा राज्य के बड़े अवैध घोटाले के मामले में आरोपी गोवा की लगभग सभी खनन कंपनियों और साथ ही कई शीर्ष नौकरशाहों और नेताओं की जांच के लिए न्यायमूर्ति एम.बी. शाह आयोग गठित की गई।


गोवा की अर्थव्‍यवस्‍था का अभिन्‍न हिस्‍सा हैं खदानें – 


गोवा की अर्थव्‍यवस्‍था में लौह अयस्क का खनन गोवा की अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है। हालांकि राज्य में 35,000 करोड़ रुपये के अवैध खनन घोटाले के बाद 2012-2014 तक दो सालों के लिए कई अरब रुपयों के इस उद्योग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।


बता दें कि गोवा ने करीब 5.5 करोड़ टन लौह अयस्क का निर्यात किया था। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने, जो अवैध खनन के इस मामले की सुनवाई कर रहा है, प्रतिबंध के बाद लौह अयस्क के खनन पर प्रति वर्ष 20 टन की सीमा तय कर दी है।


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