मरीज हो चुके थे दृष्टिहीन, अब देखने लगे दुनिया

चंडीगढ़ | डॉक्टरों ने बताया कि दोनों मरीजों की एक हफ्ते के अंदर सर्जरी की गई है। गांठ होने के कारण ये मरीज दृष्टिहीन हो चुके थे। अब अगले 24 घंटे के दौरान दिखाई देना शुरू हो गया है। सर्जरी को करने में 6 घंटे का समय लगा। ब्रेन खोलने पर आंखों पर असर आने का डर रहता है। वहीं, रिकवरी भी धीमी गति से होती है।
पीजीआई चंडीगढ़ के न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने दो मरीजों को नई जिंदगी दी। मरीजों के नाक और ब्रेन के पास हुई तीन सेमी की प्लेनम मेनिंगियोमा गांठ को बिना दिमाग खोले निकालने में सफलता हासिल की है। इस सर्जरी को अंजाम देने के लिए विशेषज्ञों ने 4के एंडोस्कोप सिस्टम का उपयोग कर गांठ को काटकर निकाला है। इससे उन मरीजों को कम होती दृष्टि को बचाने में भी सफलता मिली है। इतना ही नहीं, दिमाग खोलकर की जाने वाली सर्जरी की तुलना में इस तकनीक से मरीजों की रिकवरी भी काफी तेजी से हो रही है। इस तरह की सर्जरी डॉक्टरों की ओर से किया जाना एक अनूठा प्रयास बताया जा रहा है।
सर्जरी करने वाले न्यूरो सर्जरी विभाग के सर्जन डॉ. एसएस ढंडापानी और ईएनटी विभाग की डॉ. रिजुनिता ने बताया कि दोनों मरीजों की एक हफ्ते के अंदर सर्जरी की गई है। आंख के पास गांठ होने के कारण हो रहे दबाव से ये मरीज दृष्टिहीन हो चुके थे, लेकिन सर्जरी के अगले 24 घंटे के दौरान उन्हें धीरे-धीरे दिखाई देना शुरू हो गया है। डॉ. ढंडापानी ने बताया कि इस सर्जरी को करने में 6 घंटे का समय लगा। इसमें 4के एंडोस्कोप सिस्टम से लैस फुल्ली हाई डेफिनेशन रिजॉल्यूशन कैमरे की मदद से बिना ब्रेन खोले नाक के जरिये गांठ को काटकर निकाला गया। ब्रेन खोलने पर आंखों पर असर आने का डर रहता है। वहीं, रिकवरी भी धीमी गति से होती है।
