चीनी स्पेस स्टेशन सोमवार को धरती पर गिरेगा

चीनी अंतरिक्ष स्काईलैब तियानगोंग-1 का मलबा सोमवार को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। दक्षिण कोरियाई न्यूज एजेंसी योनहाप के अनुसार मलबे के सोमवार सुबह 7:26 बजे से दिन में 3:26 बजे के बीच वायुमंडल में प्रवेश करने का अनुमान है। हालांकि इसके गिरने के सही समय और स्थान के बारे में अभी तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। चीनी अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार को यह जानकारी दी।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही स्पेस स्टेशन के अवशेष वायुमंडल में प्रवेश करेंगे तो उनका अधिकांश हिस्सा जल कर राख हो जाएगा। यह भी कहा गया है कि मलबे का बड़ा टुकड़ा धरती तक नहीं पहुंचेगा। यह पहली बार नहीं है, जब कोई उपग्रह या अंतरिक्ष यान अनियंत्रित होकर धरती पर गिरेगा। इससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं।
मीर स्टेशन : 23 मार्च 2001 : सोवियत संघ की अंतरिक्ष में लंबी छलांग का प्रतीक मीर स्टेशन न्यूजीलैंड और चिली के बीच प्रशांत महासागर में 23 मार्च 2001 को गिरा। उसके जलते हुए मलबे को फीजी के आसमान के ऊपर देखा गया। यह 1986 में रवाना हुआ था।
सलयुत 7 : सात फरवरी 1991 : सोवियत यूनियन के अंतरिक्ष कार्यक्रम का यह अंतिम यान था। 40 टन के इस यान का मलबा कुछ तकनीकी खराबी आने के बाद सात फरवरी 1991 को अर्जेंटीना में गिरा। यह 1982 को अंतरिक्ष रवाना हुआ था।
स्काईलैब : 11 जुलाई 1979 : स्काईलैब अमेरिका का पहला अंतरिक्ष स्टेशन था, जिसे नासा ने 1973 में लांच किया था। यह 1974 तक इसमें क्रू मौजूद रही, मगर इसके बाद 85 टन के अंतरिक्ष स्टेशन में कुछ खराबी आ गई और यह 11 जुलाई 1979 को ऑस्ट्रेलिया में क्रैश हो गया।
कोलंबिया : एक फरवरी 2003 : कोलंबिया स्पेस शटल का हादसा अब भी बहुत से लोगों के जहन में ताजा होगा। इस हादसे में यान में मौजूद सभी सात अंतरिक्षयात्रियों की मौत हो गई थी। यह 80 टन का यान टेक्सास और लुइसियाना में एक फरवरी 2003 को क्रैश हो गया।
