यह है कठुआ के उस गांव का हाल, जहां कभी गूंजती थीं उस बच्ची की किलकारियां…

नई दिल्ली: घने जंगल के बीच आधे घंटे की पैदल चढ़ाई, तब आप पहुंचते हैं कठुआ के इस रायसना गांव. इसी गांव में आठ साल की उस बच्ची का घर है, जिसकी जनवरी में गैंगरेप के बाद नृशंस हत्या कर दी गई. यहां आसपास कोई और रिहायश नहीं है. जंगल के बीचों बीच ये अकेला घर है. खानाबदोश बकरवाल जनजाति का घर जो सर्दियों में नीचे मैदानों में बसते हैं और गर्मियों में अपने मवेशियों को लेकर यहां ऊंचे पहाड़ी इलाकों में आ जाते हैं.
आधा घंटा और पैदल चलकर हम पहुंचे मारी गई बच्ची के चाचा मोहम्मद जान के घर. उन्होंने बताया कि हिंदू बहुल इलाके में रह रहे चार मुस्लिम परिवारों के साथ ज़मीन का विवाद ही इस पूरे मामले की जड़ में है. दोनों समुदायों के बीच ये खींचतान हमेशा से रही लेकिन पिछले साल ये तब बहुत बढ़ गई जब हिंदू परिवारों ने मुस्लिमों को बेची गई क़रीब एक एकड़ ज़मीन लौटाने की मांग की. उन्होंने स्थानीय कब्रिस्तान में मारी गई बच्ची को दफ़नाने भी नहीं दिया.
क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक हिंसा के पीछे मुख्य वजह बकरवाल समुदाय को यहां से हटाना था, लेकिन कठुआ में अब इस मामले की सीबीआई जांच की मांग ज़ोर पकड़ रही है. इस बीच आरोपियों के परिवार पिछले तेरह दिन से जम्मू-पठानकोट हाइवे पर धरने पर बैठे हैं.
क्राइम ब्रांच के मुताबिक इस पूरे मामले की साज़िश सांझी राम ने रची. हमने उसकी बेटी मधु से बात की. मधु के मुताबिक पुलिस ने ये पूरा केस ख़राब कर दिया है और उसके पिता और अन्य लोगों को ग़लत तरीके से गिरफ़्तार किया है. उधर जम्मू में बार एसोसिएशन इस बात पर अड़ी हुई है कि मामले की जांच ठीक से नहीं हुई..
इस सबके बीच जम्मू की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने एक ट्वीट में कहा कि कुछ लोगों के बयानों और ग़ैर ज़िम्मेदाराना हरक़तों से क़ानून का रास्ता नहीं रुकेगा. सही प्रक्रिया अपनाई जा रही है और जांच तेज़ी से चल रही है. इस मामले में न्याय होगा.
