सोने-चांदी पर भारी जिंक-कॉपर, इस साल दिया 34% तक का रिटर्न

कमोडिटी मार्केट में इस साल बड़ा बदलाव देखा गया। बेस मेटल्स ने साल 2021 में जहां 24 से 34% रिटर्न दिया, वहीं बुलियन (सोना-चांदी) के भाव में क्रमश: 4.1% और 8.5% गिरावट आई। नए साल में यह रुझान पलट सकता है। 2021 की पहली तीन तिमाहियों में निवेश के लिए सोने की मांग 700 टन रही, जो एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में करीब 38% कम है। इस दौरान कुल मांग भी 2,939 टन से 9.4% घटकर 2,663 टन रह गई, जबकि जिंक और एल्युमीनियम 2021 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले बेस मेटल्स रहे। इस बीच शेयर बाजारों में उछाल के चलते निवेश के लिए सोने मांग कमजोर पड़ गई।
तेज रफ्तार वैक्सीनेशन के कारण सोने में कमजोरी- केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि सोने-चांदी में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह देश में बड़े पैमाने पर तेज रफ्तार वैक्सीनेशन रही। इसके चलते कोविड महामारी को लेकर चिंता दूर हुई और बुलियन मार्केट ने वह सपोर्ट खो दिया, जो उसे 2020 में अनिश्चितता के चलते मिला था। दूसरी तरफ सप्लाई की दिक्कत से बेस मेटल को सपोर्ट मिला। इसके अलावा दुनियाभर की सरकारों ने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया। जाहिर है, सप्लाई की दिक्कतों के बीच बेस मेटल्स की डिमांड बढ़ती चली गई।
सोने-चांदी के दाम बढ़ने की संभावना- अमेरिका समेत दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का अंदेशा है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इससे सोने-चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा। रणनीतिक निवेशक अभी सोने-चांदी से बाहर नहीं निकले हैं। इसलिए लंबी अवधि में सोने-चांदी में तेजी आने की संभावना है।
घट सकती हैं बेस मेटल्स की कीमतें- 2022 की दूसरी छमाही से मौजूदा रुझान पलटने की संभावना है। इसकी वजह साफ है, बेस मेटल्स के सबसे बड़े सप्लायर्स में से एक चीन में उत्पादन नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है।
