सोने-चांदी में खेल रहे हैं बिहार के अफसर, अवैध कमाई का जरिया बना बालू और शराब

बिहार | में अफसर-राजनेता व माफियाओं के गठजोड़ से बालू का अवैध खनन निर्बाध रूप से जारी है। अवैध खनन की लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर बीते मई माह में ही आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को सरकार ने उन लोक सेवकों का पता लगाने का टास्क दिया जिनकी बालू माफिया से साठगांठ थी। पता चलते ही ऐसे 41 प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इन्हें निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही ईओयू को दोषी पाए गए अधिकारियों द्वारा अर्जित संपत्तियों की जांच का आदेश दिया गया। इसके बाद इन अफसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर एक के बाद एक करके छापेमारी का सिलसिला शुरू हो गया।

 

बालू के खेल में इस साल 13 अगस्त से 21 दिसंबर तक 12 अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई। इनमें भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी व भोजपुर के एसपी रहे राकेश कुमार दुबे एवं औरंगाबाद के एसपी रहे सुधीर कुमार पोरिका (आईपीएस) भी शामिल हैं। दुबे के पास आय से 90 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिली है। इसके अलावा इन अधिकारियों में खान व भूतत्व विभाग के सहायक निदेशक संजय कुमार, औरंगाबाद के पूर्व डीटीओ व दरभंगा के अपर समाहर्ता अनिल कुमार सिन्हा समेत चार एसडीपीओ व दो एमवीआई हैं। राज्य के खनन मंत्री के आप्त सचिव रहे मृत्युंजय कुमार के यहां एसवीयू की छापेमारी में 30 लाख की नकदी तथा 60 लाख के आभूषण एवं सोने के 40 बिस्कुट बरामद किए गए।

 

शराबबंदी के बाद जारी है तस्करी का धंधा
इसी तरह राज्य में शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब की तस्करी का धंधा धड़ल्ले से आज भी जारी है। इन धंधों से कमाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब बीते एक दिसंबर को वैशाली जिले के लालगंज थाना प्रभारी घनश्याम शुक्ला के ठिकानों पर छापेमारी की गई तो उनके पास आय से 98 फीसद अधिक संपत्ति होने का पता चला। इतना ही नहीं सिपाही रहे बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कुमार धीरज के ठिकाने पर ईओयू ने छापेमारी की तो उनके पास आय से 544 प्रतिशत अधिक की संपत्ति होने का पता चला।जानकार बताते हैं कि जब तक नेता-अफसरों के गठजोड़ की वजह से ट्रांसफर-पोस्टिंग में पैसे व पैरवी का खेल समाप्त नहीं होगा, तब तक लोकसेवकों के भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाया जा सकेगा। "'जब कोई अफसर एक निश्चित रकम देकर पोस्टिंग पाता है तो तय है कि वह उससे ज्यादा कमाने का टारगेट रखेगा और इस टारगेट को तो वह भ्रष्टाचार से ही प्राप्त करना चाहेगा। दारोगा, बीडीओ-सीओ, एमवीआई व डीटीओ जैसे मलाईदार पद तो इस राज्य में जैसे काली कमाई के लिए ही सृजित किए गए हैं।''

सामाजिक कार्यकर्ता राजेश चौधरी कहते हैं, "'आप स्थिति को ऐसे समझिए, जब भोजपुर में राजस्व कर्मचारी 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया तो उसने तुरंत ही विजिलेंस की टीम से साफ-साफ कहा कि इसमें सीओ साहब समेत सभी का हिस्सा है। अब आप भ्रष्टाचार की चेन को समझ सकते हैं।''

ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचारी पकड़े नहीं जाते हैं किंतु इतना तो सच है कि सजा कम को ही मिल पाती है। इस मुद्दे पर ईओयू व एसवीयू के अपर पुलिस महानिदेशक नैयर हसनैन खान कहते हैं, ''आय से अधिक संपत्ति (डीए) वाले मामले में सजा मिलने की दर कम है। ऐसा केस के लंबा खिंच जाने के कारण होता है। कोशिश की जा रही है कि समय सीमा के अंदर चार्जशीट हो जाए तथा तेजी से ट्रायल हो सके। कोर्ट में हम पूरे साक्ष्यों के साथ जाएंगे ताकि हर हाल में दोषियों को सजा मिले।''

 

 

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