9 टू 5 जॉब से एंग्जायटी का शिकार हुई, अमेरिका गई, देश लौटी तो भारत की पहली जुंबा एंबेसडर बनकर

10.7 लाख की आबादी वाले छोटे शहर रांची से निकल मेट्रोपोलिटन सिटी मुंबई पहुंची, जहां एक कॉरपोरेट कंपनी में जॉब मिल गई। बड़ी इमारतें, एसी से जड़ा हुआ ऑफिस, गद्देदार कुर्सियां सबकुछ एकदम रहिसियत से भरा था। रांची वालों को लगता था कि मैं बहुत सही जगह पहुंच गई हूं और पापा का नाम रोशन करने में सफल हुई हूं। सभी के लिए आइडियल गर्ल बन गई थी लेकिन जब मुंबई में आकर इंजीनियर बनी तो पियर प्रेशर, परफोर्मेंस एंग्जायटी का शिकार हो सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर की चपेट में आ गई। इस स्ट्रेस को दूर भगाने के लिए डांस करने जाती। फिर एक दिन सब कुछ छोड़ दिया और वो किया जो मेरा यूरेका मोमेंट मुझे देता। ये शब्द हैं भारत में जुंबा को इंट्रोड्यूस करने वाली और अंबेसडर सुचेता पाल के।
मुझे बचपन से डांस का शौक था। टीवी पर गाने आते तो खूब नाचती। उन गानों के साथ इठलाती-मंडराती और अपनी रौ में होती, चूंकि छोटे शहरों में डॉक्टर, इंजीनियर बनने के सिवाय और ऑप्शन नहीं होते तो मैंने इंजीनियर बनना चुना। लेकिन कॉरपोरेट लाइफ में हेल्थ इशुज बढ़ने लगे तो खुश होने के लिए करिअर बदलना जरूरी समझा।
इंजीनियर छोड़ फ्रीलांसिंग की
नौकरी के साथ-साथ बेले, जैज सीखती। धीरे-धीरे इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी। इस नौकरी को छोड़ तीन अलग-अलग नौकरियां कीं ताकि मैं जिंदा रहूं। मुझे मेरा पैशन फॉलो करना था। इसके लिए ईगो साइड रखा और बहुत धैर्य से अपने काम पर लगी रही।
शादी, अमेरिका और जुंबा
2009 में मेरी शादी हुई और ये लाइफ का टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ, क्योंकि शादी के बाद मैं और मेरे हसबैंड अमेरिका शिफ्ट हो गए और यहीं से मेरी जुंबा एजुकेशन स्पेशलिस्ट बनने की कहानी शुरू हुई। मैं जुंबा की क्लासिस में गई और उसकी एडिक्टिड हो गई। यहां मुझे फिटनेस के साथ-साथ डांस और खुशी भी मिल रही थी। यहां से सीखने के बाद मैंने जुंबा इंस्ट्रक्टर बनने के लिए लाइसेंस लिया। जुंबा की दुनिया में ये मेरी पहली सीढ़ी थी। कॉरपोरेट लाइफ से फिटनेस और डांस की दुनिया में एंट्री मारना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। इस वक्त मुझे सीखने को मिला कि अगर आपको ऑपरच्युनिटी मिलती है तो उसमें खुद का बेस्ट दें। बेस्ट क्वालिटी का काम दें। अगर आप बेस्ट होंगे तो आगे बढ़ने के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएंगे।
जुंबा एजुकेशन स्पेशलिस्ट बनना
मैं अपने काम का हंडरेड परसेंट दे रही थी कि तभी जुंबा के सीइओ की तरफ से बुलावा आया मुझे मियामी बुलाया गया। ऑडिशन हुआ और मैं जुंबा एजुकेशन स्पेशलिस्ट चुन ली गई। पूरी दुनिया में करीब 200 एजुकेशन स्पेलिस्ट हैं जो जुंबा सिखाते हैं और उनमें से मैं भी एक हूं।
अमेरिका से जब मैं अपने देश आई तो इंडिया की पहली जुंबा एजुकेशन स्पेशलिस्ट बनकर लौटी। ये मेरे लिए बड़ा एचीवमेंट था। मैं कभी फिटनेस इंडस्ट्री में नहीं थी। क्योंकि मेरे पास कोई एक्सपीरियंस नहीं था।
भारत में फैलाया जुंबा
भारत आने के बाद मैं हर राज्य के जिम में जाकर जुंबा के बारे में बात करती। अब मेरे सिखाए हुए हजारों स्टूडेंट आज जुंबा इंस्ट्रक्टर हैं। मैंने अपना हंड्रेड परसेंट देकर काम किया और इस मेहनत को मिनिस्ट्री ऑफ वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट ने पहचाना और मिनिस्ट्री से मुझे ई-मेल आया कि वे भारत की 100 महिलाओं को राष्ट्रपति भवन में अलग-अलग स्ट्रीम की पहली महिलाओं को बुला रहे हैं, जिसके लिए मुझे भी इनवाइट किया गया। ‘वुमन वेलनेस और जुंबा’ में काम करने के लिए मुझे बुलाया गया और अवॉर्ड दिया गया।
उम्र के साथ उद्देश्य बदलते रहते हैं
जिंदगी में जरूरी नहीं कि उद्देश्य हमेशा एक रहे। क्योंकि हम जैसे-जैसे बड़े होते हैं वैसे-वैसे अपॉरच्युनिटी मिलती हैं और परस्पेक्टिव भी बदलते हैं। पहला मेरा परपस एजुकेशन में कुछ करने का था फिर मैंने सोचा कि इंजीनियर बनना है। फिर डांस में जाना सोचा तब मुझे जुंबा मिला। फिर टीचिंग पसंद थी तो जुंबा एजुकेशन स्पेशलिस्ट बनी और आज मैं भारत में जुंबा की अंबेसडर हूं। अब भारत में कहीं भी कोई टीवी शो होता है जो जुंबा से जुड़ा हो तो मुझे वहां बुलाया जाता है। अब तक मैंने गौरी खान, यामी गौतम, बिपाशा बसू के साथ काम किया है।
