सरकार नकल माफिया गिरोह पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल-राठौड़

जयपुर । राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने वक्तव्य जारी कर कहा कि एसओजी द्वारा जयपुर स्थित शिक्षा संकुल के स्ट्रॉन्ग रूम से मुख्य अभियुक्त रामकृपाल मीणा द्वारा उदाराम विश्नोई को 1 करोड़ 22 लाख रुपये में रीट पेपर दिए जाने की बात के खुलासे के बाद पूर्णतया स्पष्ट हो चुका है कि रीट भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर धांधली हुई है, इसलिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी को तत्काल प्रभाव से रीट प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।  राठौड़ ने कहा कि जिस तरह रीट पेपर लीक प्रकरण में एसओजी के अनुसंधान के पश्चात् अब तक 35 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है उनमें बड़े प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे एवं कई मुख्य अभियुक्तों के कांग्रेस नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध भी सामने आए हैं। गहलोत सरकार में ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों की मिलीभगत व उनके संरक्षण के बिना इस तरह पेपर लीक नहीं हो सकता।
राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार के राज में रीट के अलावा लाइब्रेरियन, एसआई व जेईएन भर्ती परीक्षाओं के भी पेपर लीक हुए लेकिन सरकार नकल माफिया गिरोह पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद राज्य सरकार ने 17 अक्टूबर 2021 को नया नकल अध्यादेश लाने की घोषणा की थी लेकिन हर घोषणा की तरह यह भी धरातल पर नहीं आ सका। अगर अध्यादेश पूर्व में सरकार लाती तो परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग गंभीर अपराध के साथ गैर जमानती भी होता,सजा 3 से बढ़कर 7 साल होती और सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की संलिप्तता मिलने पर उन्हें बर्खास्त किया जाता। राठौड़ ने कहा कि 24 दिसंबर 2019 को पहली बार रीट की परीक्षा अगस्त 2020 में करवाए जाने की घोषणा के बाद लगातार करीब 6 बार परीक्षा तिथि बढ़ाकर 26 सितंबर 2021 को परीक्षा आयोजित करवाई गई जिसमें 2 चरणों में 26 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया और उन्हें सरकारी बदइंतजामी का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। परीक्षा के दिन 30 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाने व नेटबंदी के बाद भी परीक्षा से डेढ़ घंटे पहले गंगापुर सिटी सहित प्रदेश के अन्य शहरों में सरकार की नाक के नीचे प्रश्नपत्र वायरल हो गया तथा युवाओं के लगातार मांग किये जाने के बाद भी सरकार ने रीट परीक्षा का पेपर लीक नहीं माना। राठौड़ ने कहा कि रीट पेपर लीक प्रकरण में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के अध्यक्ष की भूमिका भी संदेह के घेरे में है क्योंकि इन्होंने अपने खास गैर सरकारी व्यक्ति प्रदीप पाराशर को जयपुर का को-ऑर्डिनेटर बना दिया जबकि शेष सभी जिलों में सरकारी व्यक्ति को कॉर्डिनेटर बनाया गया था। स्पष्ट है, रीट परीक्षा पेपर को सुनियोजित साजिश के तहत लीक करवाया गया और बड़ी संख्या में युवाओं को 8-12 लाख रुपये लेकर पेपर बेचा गया। राठौड़ ने कहा कि सत्ता में बैठे राजनीतिक आकाओं की सरपरस्ती में राज्य में नकल माफिया गिरोह युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ कर रहा है और सरकार मौन है। रीट परीक्षा से 1 दिन पूर्व शिक्षा संकुल से पेपर निकाले जाने के बाद यह पेपर कहां-कहां गए होंगे व कितने पेपर निकाले होंगे, यह जांच का विषय है। कुल मिलाकर रीट परीक्षा की पवित्रता भंग हुई है और पेपर लीक होना मेहनतकश युवाओं के भविष्य के साथ घिनौना मजाक है।
 

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