पूर्व राजदूत माधुरी गुप्ता को पाकिस्तानी आईएसआई के लिये जासूसी के जुर्म में तीन साल की सजा

नईदिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में सेवा दे चुकीं पूर्व राजदूत माधुरी गुप्ता को जासूसी के जुर्म में आज तीन साल जेल की सजा सुनायी। अदालत ने माधुरी गुप्ता को पाकिस्तान की आईएसआई को संवेदनशील सूचनाएं देने के जुर्म में दोषी करार दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने पूर्व राजदूत को जासूसी के अपराध एवं कानून के तहत संरक्षित सूचना को गलत तरीके से भेजने के लिये अधिकतम सजा सुनायी।
माधुरी उच्चायोग में ( प्रेस एवं सूचना ) द्वितीय सचिव थीं। उन्हें कल आपराधिक गोपनीयता ( ओएस ) अधिनियम के विभिन्न प्रावाधानों के तहत दोषी ठहराया गया।
अदालत से उन्हें जमानत मिली हुई है और खुद को दोषी ठहराये जाने एवं सजा के खिलाफ याचिका दायर करने की अनुमति भी मिली है।
उन्हें दोषी ठहराते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी ने जिन ईमेल की उन्हें जानकारी दी उसमें बेहद संवेदनशील सूचनाएं थीं जो दुश्मन देश के लिये उपयोगी हो सकती हैं … और उन की गोपनीयता बेहद महत्वपूर्ण है।
माधुरी गुप्ता को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा तीन एवं पांच के तहत दोषी ठहराया गया।
पाकिस्तानी अधिकारियों को कथित रूप से संवेदनशील सूचना देने और आईएसआई के दो अधिकारियों मुबशर रजा राणा एवं जमशेद के संपर्क में रहने के आरोप में उन्हें 22 अप्रैल 2010 को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने गिरफ्तार किया था।
