अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2018: 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है योग दिवस

नई दिल्ली 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। पहली बार इसे 21 जून 2015 में मनाया गया था। जिसकी पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से की थी। 11 दिसम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है।
21 जून को ही क्यों?
21 जून को ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बनाए जाने के पीछे वजह है कि इस दिन ग्रीष्म संक्रांति होती है। इस दिन सूर्य धरती की दृष्टि से उत्तर से दक्षिण की ओर चलना शुरू करता है। यानी सूर्य जो अब तक उत्तरी गोलार्ध के सामने था, अब दक्षिणी गोलार्ध की तरफ बढऩा शुरु हो जाता है। योग के नजरिए से यह समय संक्रमण काल होता है, यानी रूपांतरण के लिए बेहतर समय होता है। ग्रीष्म संक्रांति का दिन पूरे वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है।
बने थे दो गिनीज रिकॉर्ड्स
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गणमान्य लोगों सहित करीब 36000 लोगों ने 21 जून 2015 को नई दिल्ली में पहले अंतर्राष्ट्रीय दिवस के लिए 35 मिनट तक 21 योग आसन का प्रदर्शन किया।
राजपथ पर हुए समारोह ने दो गिनीज रिकॉर्ड्स बनाए जिसमें सबसे बड़ी योग क्लास यानी 35,985 लोगों के साथ योग और चौरासी देशों के लोगों द्वारा इस आयोजन में एक साथ भाग लेने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। इस रिकॉर्ड को आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने स्वयं ग्रहण किया था।
