सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- बेजा टिप्पणी से बचें, जजों को हर समस्या के पहलू का नहीं होता पता

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा देश में अनेक समस्याएं हैं और ऐसे में सुनवाई के दौरान सरकार के खिलाफ कोर्ट को बेजा टिप्पणी करने से बचना चाहिए। केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल ने यह अनुरोध जेलों की बुरी हालत पर सुनवाई के दौरान बुधवार को किया। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल का इशारा जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर था। इस पीठ ने हाल के दिनों में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कई बार सरकार पर निशाना साधा है। पीठ ने जेलों की बुरी हालत पर कहा कि सरकार कुछ नहीं कर रही है और मजदूरों के लिए एकत्र 100 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं किया गया है। 


दूसरों के अधिकार का ख्याल रखें : वेणुगोपाल ने अख़बारों की सुर्खियों का हवाला दिया। ये जजों की टिप्पणियों पर आधारित थे। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जजों को सरकार की हर समस्या के पहलू का पता नहीं पता होता है, ऐसे में उन्हें कोई भी टिप्पणी करने से बचना चाहिए। वेणुगोपाल ने कहा हर दिन मैं आपके टिप्पणियों को पढ़ता हूं। लेकिन एक जज सभी समस्याओं के सभी पहलुओं को नहीं जानता है। किसी भी पीआईएल पर फैसला सुनाने के दौरान जजों को दूसरों के अधिकारों का भी ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘आपको ये भी समझना चाहिए कि आदेशों का असर होता है। उनके कई परिणाम हो सकते हैं जो किसी दूसरे के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। उनके लिए, सरकार को सोचना होता है।’ 


कई फैसलों से भारी नुकसान : वेणुगोपाल ने पीठ को कहा कि अदालत द्वारा टूजी लाइसेंस रद्द करने से बड़े विदेशी निवेश में कमी आई है। उन्होंने कहा कि इसी तरह, हाईवे से शराब के ठेके हटाने के आदेश से भारी वित्तीय नुकसान हुआ, लोगों के रोज़गार खत्म हो गए। वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी राय में जनहित के हर आदेश में ये भी लिखा होना चाहिए कि ऐसे आदेशों से क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा हर आदेश के बारे में संतुलित होकर सोचना चाहिए। भारत में कई समस्याएं हैं। गरीबी, निरक्षरता, गंभीर समस्यों पर जागरुकता की कमी है। सरकार को पहले ऐसे लोगों को देखना होता है जो हर दिन सिर्फ 100 रुपये कमाते हैं। 


हर समस्या के लिए आलोचना नहीं

जस्टिस लोकूर की पीठ ने वेणुगोपाल को स्प्ष्ट किया कि शीर्ष अदालत देश की प्रत्येक समस्या के लिए सरकार की आलोचना नहीं कर रही है। हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हमने हर चीज के लिए सरकार की आलोचना नहीं की है और न ही कर रहे हैं।

जेलों पर सुझाव को समिति बनेगी

कोर्ट ने जेलों की समस्याओं पर विचार करने और उनसे निपटने के सुझाव देने के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। अदालत ने कहा कि जेल सुधारों के लिए प्रस्तावित समिति में भारत सरकार के भी दो या तीन अधिकारियों को शामिल किया जाएगा जो जेलों में बंद महिला कैदियों सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार करेगी।


अधिक कैदी रखने पर आपत्ति 

शीर्ष अदालत देश की 1,382 जेलों की अमानवीय स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इससे पहले, जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को रखने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि कैदियों के भी मानवाधिकार होते हैं और उन्हें जानवरों की तरह नहीं रखा जा सकता। पीठ ने इस मामले की सुनवाई 17 अगस्त के लिए स्थगित कर दी है।


कोर्ट बोर्ड ऑफ विजिटर्स न होने पर नाराज

शीर्ष अदालत ने पांच अगस्त को अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि अनेक राज्यों ने अभी तक बोर्ड ऑफ विजिटर्स की नियुक्ति नहीं की है, जो नियमित रूप से जेलों का निरीक्षण करके यह सुनिश्चित करेंगे कि इनका संचालन नियमों के अनुसार किया जा रहा है। 


समिति गठन पर सरकार सहमतसरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- बेजा टिप्पणी से बचें, जजों को हर समस्या के पहलू का नहीं होता पता


अटार्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने जेल सुधारों के बारे में समिति गठित करने के न्यायालय के विचार से सहमति व्यक्त की और पीठ से कहा कि ऐसे ही कई अन्य क्षेत्रों में भारत अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या करीब 1.3 अरब है और इसमें विस्फोटक तरीके से वृद्धि हो रही है और भी अनेक समस्याओं से देश रूबरू हो रहा है। हम इनमें से कुछ समस्याओं को हल करने का प्रयास कर रहे हैं।


वाशिंग मशीनें खरीद रहे पर लोगों के पास कपड़े नहीं 

देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने और उनकी बुरी हालत पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार वाशिंग मशीनें खरीद रही है, जबकि लोगों के पास पहनने के लिए कपड़े ही नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि अनपढ़ों के लिए लैपटॉप खरीदें जा रहे हैं। 


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