चीन से दोस्ती बढ़ा भारत की अनदेखी कर रहा मालदीव, बढ़ रही है दोनों देशों के बीच तल्खी

भारत को नजरअदांज करने की मालदीव सरकार की कोशिशों के चलते दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तल्खी बढ़ती नजर आ रही है। रिश्ते सुधारने की कोशिशों के बावजूद मालदीव सरकार के मौजूदा रुख से भारत नाराज है। अब उसकी निगाह मालदीव में अगले महीने होने वाले चुनावों पर है, जिसके बाद ही दोनों देशों के संबंधों में सुधार आने की गुजाइश दिख रही है।


चीन के प्रभाव में अनदेखी : कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि मालदीव सरकार बार बार भारत की अनदेखी कर रही है। भारत की ओर से दिए गए हेलीकॉप्टर को वापस करने का हालिया बयान चीन के प्रभाव में भारत को चिढ़ाने की नई कोशिश है। पूर्व राजनयिक एनएन झा का कहना है कि भारत को अपने पड़ोस में चीन की कूटनीतिक चहलकदमी को ध्यान में रखकर रणनीति बनाने की जरूरत है।


असहज करते फैसले

मालदीव के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को चीन का करीब माना जाता है। मालदीव में आपातकाल की घोषणा से पहले यामीन सरकार ने कई ऐसे फैसले किए जिससे उसके साथ भारत के कारोबारी रिश्ते और पर्यटन पर असर पड़ रहा है। मालदीव ने बार-बार अनुरोध के बावजूद वर्क परमिट और बिजनेस वीजा में कटौती जारी रखी है। इससे सैकड़ों कामगार वापस मालदीव नहीं जा सके। नौकरियों के विज्ञापनों में भी भारतीयों से भेदभाव किया गया है। 


भारत की अनदेखी

आपातकाल लागू करने के दौरान  भारत के अनुरोध को नकारते हुए मालदीव सरकार चीन के संपर्क में बनी रही। यामीन सरकार ने भारत से अंदरूनी मामलों में दखल न करने को भी कहा। इसके अलावा सार्क सम्मेलन रद्द करने के मुद्दे पर भी मालदीव सरकार ने ना-नुकर की। अब वह भारतीय सैनिकों की सीमित मौजूदगी पर आपत्ति जताकर सहायता के लिए दिए गए हेलीकॉप्टर वापस करने की बात कर रही है।

भारत के पड़ोसी देशों में प्रभाव बढ़ा रहा चीन

चीन ने पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश के साथ मालदीव में अपना प्रभाव बढ़ाया है। भूटान से भी उसने कूटनीतिक रिश्ते बनाने की कोशिशें की हैं। जानकारों का कहना है कि भारत को अपने पड़ोसियों से कूटनीतिक रिश्तों में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है। 

भारत ने पाकिस्तान को छोड़कर अन्य पड़ोसियों से संतुलन बनाए रखने में कूटनीतिक कामयाबी हासिल की है। बांग्लादेश से उसके रिश्ते पिछले एक दशक में काफी बेहतर हुए हैं। नेपाल में चीन के प्रति रुझान रखने वाली सरकार के बावजूद भारत पर उसकी निर्भरता के चलते रिश्तों में संतुलन है। लेकिन मालदीव सरकार लगातार भारत की अनदेखी कर उसे चिढ़ाने का प्रयास कर रही है।


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