चीन ने मानवाधिकार वकीलों की व्यथा बयां करने वाले जर्मन छात्र को किया निष्कासित

बीजिंग : जर्मनी के एक छात्र को हाल ही में उनके साथ घटी एक घटना से यह अहसास हो गया कि चीन में पत्रकारिता आसान नहीं है और इससे आपके लिए गंभीर परेशानियां भी खड़ीं हो सकती हैं. बीजिंग के ‘त्सिन्गुआ विश्वविद्यालय’ में पत्रकारिता एवं सचार में स्नातकोत्तर कर रहे डेविड मिजल (24) को रविवार को अपने देश जर्मनी वापस लौटना पड़ा.


आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें कहा था कि उनका वीजा रद्द हो गया है और उन्हें एक सप्ताह के भीतर देश छोड़ना होगा. मिजल को लगता है कि पत्रकारिता की एक कक्षा में जेल में बंद मानवाधिकार वकीलों की दुर्दशा के बारे में रिपोर्ट देने के कारण उनके साथ ऐसा हुआ.


उन्होंने कहा कि त्सिन्गुआ के प्रतिनिधियों ने उन्हें पहले भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों से दूर रहने के लिये दो बार आगाह किया था लेकिन वह नहीं रुके क्योंकि वह ‘‘चीनी समाज और राजनीति के बारे में जानना चाहते थे.’’ चीन ने नौ जुलाई 2015 में देशभर में करीब 300 लोगों को हिरासत में लिया था. मानवाधिकार वकीलों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ चलाया गया यह सबसे बड़ा अभियान था.


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