चांद पर पानी मिलने के बाद अब घर बनाने की तैयारी

वाशिंगटन,चांद पर पानी का भंडार मिलने की खबर से खुश होने वाले तमाम लोगों के लिए एक और अच्छी खबर है। अपने प्रेमी-प्रेमिका को चांद पर घर बसाने का वादा कर चुके हैं, तो परेशान न हों आपका यह सपना जल्द हकीकत में बदल सकता है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी के विशेषज्ञों ने चांद से धरती पर लाई गई मिट्टी से ईंटे बनाने का दावा किया है। इन ईंटों का इस्तेमाल भविष्य में चांद पर रिहायशी बस्ती बसाने में किया जाएगा।
ईएसए के विशेषज्ञों का कहना है कि यह ईंटें चंद्रमा पर इंसानी बसेरा बनाने की ओर पहला कदम है। ईएसए के साइंस एडवाइजर ऐडान कोली ने कहा कि चंद से लाई गई मिट्टी को पहले इकट्ठा किया गया और फिर उसे भट्ठी में तपाकर ईंटें बनाई गई हैं। कोली ने कहा कि इन ईंटों से वहां सड़क और लांच पैड या रिहायशी इमारत बनाई जा सकती है। चंद्रमा की सतह पर चारों तरफ स्लेटी, बारीक मगर भुरभुरी मिट्टी है। यह एक ऐसा स्रोत है, जो वहां रिहायशी बस्ती बसाने में काम आएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि चंद्रमा की मिट्टी बसॉल्ट पत्थर जैसी है, जो सिलिकेट से बनी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धरती और चंद्रमा का भौगोलिक इतिहास एक समान है। इसलिए चंद्रमा पर पाई जा सकने वाली मिट्टी मिलना मुश्किल नहीं है, क्योंकि उसकी सतह भी लावा के जमने से बनी है। तकरीबन 4.5 करोड़ साल पहले जर्मनी के कोलोन में ज्वालामुखी विस्फोट हुटा था। यूरोपीय एस्ट्रोनॉट सेंटर के शोधकर्ताओं को इसी क्षेत्र के आसपास मिट्टी मिली, जो चंद्रमा की मिट्टी के समान थी। इसी की मदद से उन्होंने ईंटें बनाने का दावा किया है। विशेषज्ञों ने इसे मेड इन यूरोप करार देते हुए ईएसी-1 नाम दिया है।
अब वह ईएसी-1 की मदद से चंद्रमा पर बस्ती बसाने के लिए जरूरी तकनीक तैयार करने में लगे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्रमा की मिट्टी में 40 फीसदी के करीब ऑक्सीजन है। वह इस ऑक्सीजन को निकालने की तकनीक तलाशने में भी लगे हुए हैं, ताकि अंतरिक्षयात्री इसका इस्तेमाल वहां पर अपना प्रवास बढ़ाने के लिए कर सकें।
