देश भर के शिक्षक एक दिन का वेतन केरल को दें : प्रकाश जावड़ेकर

नई दिल्ली।केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केरल में आई बाढ़ को देखते हुए प्रधानंत्री रहत कोष में अपना एक महीने का वेतन दान किया है। उन्होंने गुरुवार को ट्वीट करके कहा, बाढ़ के कारण केरल में अभूतपूर्व विनाश हुआ है। मैंने प्रधानमंत्री राहत कोष में अपने एक महीने का वेतन दान में दिया है। उन्होंने अपने मंत्रालय के सभी कर्मचारियों और शिक्षकों को केरल में राहत एवं पुनर्वास कार्य के लिए कम से कम एक दिन का वेतन देने की अपील भी की है। 

यूएई की मदद नहीं लेनी तो केंद्र 2600 करोड़ दे

केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)की ओर से 700 करोड़ रुपये की मदद की पेशकश देश में राजनीतिक विवाद का कारण बना हुआ है। केरल में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी भाकपा ने गुरुवार को केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उसे यूएई की मदद मंजूर नहीं तो 2600 करोड़ रुपये की अंतरिम राहत तत्काल जारी करनी चाहिए। 

भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव एस.सुधाकर रेड्डी ने इसके साथ ही आरोप लगाया कि आपदा के समय केंद्र विदेशी मदद पर झूठे स्वाभिमान का हवाला दे रहा है। उन्होंने कहा, जब कोई देश प्राकृतिक आपदा का सामना करता है, तो सामान्य तौर पर विभिन्न देश मदद की पेशकश करते हैं। भारत स्वयं भूंकप आपे पर नेपाल, बांग्लादेश यहां तक कि पाकिस्तान भी पहले  मदद कर चुका है। ऐसी परिस्थिति में हमें संयुक्त राष्ट्र और यूएई सहित जो भी मदद करे, बिना शर्त स्वीकार करनी चाहिए।  

रेड्डी ने कहा, केंद्र केरल की ओर से मांगी राशि जारी करने को तैयार नहीं है। हम 20 हजार करोड़ रुपये नहीं मांग रहे हैं। राज्य ने केवल 2600 करोड़ रुपये की अंतरिम मदद मांगी है। अगर यूएई की मदद नहीं लेनी तो केंद्र को यह राशि तुरंत जारी करनी चाहिए। 

मदद नहीं लेने की नीति विरासत में मिली : अल्फोंस 

केंद्र सरकार की ओर से देशों से मदद नहीं स्वीकार करने के फैसले का केंद्रीय मंत्री अल्फोंस कन्ननथनम ने बचाव किया है। उन्होंने गुरुवार को कहा, केंद्र केवल 14 साल पुरानी नीति का अनुपालन कर रहा है, जो उसे पिछली सरकार से विरासत में मिली है। अल्फोंस ने कहा, 2004 में आई सुनामी के दौरान तत्काल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विभिन्न देशों से मदद की पेशकश को अस्वीकार कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने भारतीयों से बढ़चढ़कर मदद करने की अपील की। 

यूपीए ने पुनर्वास के लिए विदेशी मदद ली : बारू 

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने गुरुवार को दावा किया कि 2004 में आई सुनामी के बाद यूपीए सरकार ने विदेशों से कोई मदद नहीं मांगी थी। लेकिन पुनर्वास के लिए स्वेच्छा से मिली मदद को स्वीकार किया था। उन्होंने यह टिप्पणी राजनयिक शिवशंकर मेनन और निरुपमा मेनन राव के टवीट पर की। इससे पहले मेनन ने  ट्वीट कर कहा था, कोई भी राहत दल बचाव अभियान में व्यवधान नहीं चाहता। लेकिन घरों, सड़कों और पुलों के निर्माण में मदद की जरूरत होती है। वहीं पूर्व विदेश सचिव निरुपमा ने ट्वीट किया था कि यह सच है कि भारत मदद लेने के बजाय देने में सक्षम है। लेकिन खाड़ी देशों में रह रहे 80 फीसदी भारतीय मलयाली हैं। इसलिए वहां से की जा रही मदद की पेशकश पर संवेदनशील रहने की जरूरत है। मदद के लिए न कह देना आसान है, लेकिन केरल की स्थिति उतनी सरल नहीं है। 

Leave a Reply