पितृ पक्ष 2018: किसके शाप के कारण राजा दशरथ को सहना पड़ा राम का वियोग

माता-पिता के प्रति श्रवण कुमार के प्रेम और समर्पण ने उन्हें आदर्श पुत्र के रूप में स्थापित किया है। जब पुत्र की कर्तव्यनिष्ठा की बात की जाती है तो श्रवण कुमार को ही उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। आज हम जानेंगे श्रवण कुमार से जुड़ी एक पौराणिक कथा, जब वह अपने नेत्रहीन माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर चार धाम की यात्रा कराने निकले थे…
श्रवण कुमार ने अपने नेत्रहीन और बुजुर्ग माता-पिता को तीर्थ करवाने के लिए एक कांवड़ तैयार की। एक तरफ मां को बैठाया और दूसरी तरफ पिता को बैठाया और चल पड़े चार धाम की यात्रा करने। माता-पिता के प्रति लगाव और स्नेह के आगे श्रवण को कांवड़ का जरा भी भार महसूस नहीं हुआ।
अयोध्या के जंगलों में पहुंचते ही माता-पिता को प्यास लगी तो श्रवण कांवड़ को रखकर सरयू नदी से पानी लाने चले गए। राजा दशरथ भी आखेट पर निकले थे। श्रवण के कदमों की आहट सुनकर दशरथ को लगा कि कोई हिरन है और उन्होंने तीर चला दिया। वह सीधे जाकर श्रवण के हृदय में लगा।
श्रवण को तीर लगते ही दशरथ को अनहोनी का एहसास हो गया। उन्हें समझ आ गया तीर हिरन को नहीं बल्कि किसी और को लगा है। तलाश करने के बाद उन्हें श्रवण कुमार नदी के किनारे मरणासन्न अवस्था में मिले।
अंतिम सास लेने से पहले श्रवण कुमार ने राजा दशरथ को अपने माता-पिता के बारे में बताया और मृत्यु को प्राप्त हो गए। दशरथ पानी लेकर जैसे ही श्रवण के माता-पिता के पास पानी लेकर, वे समझ गए कि ये कदमों की आहट उनके पुत्र का नहीं है।
दशरथ ने जैसे ही उन्हें पूरी घटना बताई श्रवण के माता-पिता फूटफूटकर रोने लगे। उनके विलाप को देखकर राजा दशरथ को मन ही मन ग्लानि हो रही थी। दशरथ अपने इस कृत्य के लिए क्षमा मांगते हैं।
दुखी माता-पिता दशरथ को शाप देते हैं ‘जिस तरह मैं पुत्र वियोग से मर जाऊंगा, वेसे ही पुत्र वियोग में तड़पोगे’। यह कहकर श्रवण के माता-पिता तत्काल अपने शरीर को त्याग देते हैं।
कई वर्षों के बाद जब भगवान राम का राज्याभिषेक होता है तो कैकयी को यह कतई स्वीकार नहीं था कि उनके पुत्र भरत की बजाए राम अयोध्या के राजा कहलाएं। फिर कैकयी वचन के रूप से राजा दशरथ से राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांग लेती हैं।
भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के वनवास पर जाने के बाद राजा दशरथ भी पुत्र वियोग में तड़पने लगते हैं और लंबी बीमारी के बाद उनकी मृत्यु हो जाती है।
