नवरात्र 2018: घट स्थापना मुहूर्त और पूजन की विधि जानें

शारदीय नवरात्र का आरंभ हर साल आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन होता है। इस वर्ष यह तिथि 10 अक्टूबर को है। शास्त्रों में बताया गया है कि नवरात्र के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करने के बाद नवग्रहों, पंचदेवता, ग्राम और नगर देवता की पूजा के बाद विधि-विधान से माता की पूजा करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि मंगल कलश की स्थापना से नवरात्र में देवी पूजन सफल और फलदायक होता है। इसलिए बड़े-बड़े पंडालों से लेकर सामान्य गृहस्थ तक अपने घर में कलश बैठाते हैं। कलश की स्थापना से यह भी पता चलता है कि आपके लिए आने वाला साल कैसा रहेगा। इसलिए शुभ मुहूर्त में ही कलश की स्थापना करनी चाहिए।
इस साल कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 26 मिनट तक है। अगर इस समय तक कलश नहीं बैठा पाते हैं तो फिर आपको दोपहर तक का इंतजार करना होगा। दोपहर में अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से लेकर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नवरात्र पूजन के लिए कलश स्थापित किया जा सकता है।
पंचांग के अनुसार इस वर्ष सुबह 7 बजकर 26 मिनट तक ही प्रतिपदा तिथि है। इसके बाद द्वितीय तिथि लग जाएगी लेकिन द्वितीया तिथि को क्षय माना जाएगा क्योंकि सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि रहेगी इससे परे दिन प्रतिपदा तिथि ही मान्य रहेगी। ऐसे में घट स्थापना के लिए सबसे उत्तम समय प्रातः 7 बजकर 26 मिनट तक है।धर्मसिंधु नामक ग्रंथ के अनुसार- स च नवरात्रारम्भः सूर्योदयोत्तरं त्रिमुहूर्त्तव्यापिन्यां प्रतिपदाकार्याः। तदभावे द्विमुहूर्त्तव्यापिन्यामपि, क्वचिन्मुहूर्त्तमात्र-व्यापिनयामपि उक्तः। सर्वथा दर्शयुक्त्तप्रतिपदि न कार्यः इति बहुग्रंथः सम्मतम्।।
यानी प्रतिपदा त्रिमुहूर्त्त-व्यापिनी ना हो तब द्विमुहूर्त व्यापिनी में, यदि द्विमुहूर्त व्यापिनी ना हो तब एक मुहूर्त व्यापिनी में भी नवरात्र आरंभ कर लेना चाहिए। इस साल 10 अक्टूबर को बुधवार को सूर्योदय बाद 2 घड़ी 18 पल तक ही प्रतिपदा तिथि है। फिर भी शास्त्रों के नियमानुसार सूर्योदय व्यापिनी प्रतिपदा होने से इसी दिन नवरात्र आरंभ हो रहा है।
नवरात्र का आरंभ बुधवार को हो रहा है। बुध को व्यापार, बुद्धि और ज्ञान का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में इस वर्ष नवरात्र को व्यापार में प्रगति के लिए अच्छा माना जा रहा है। छात्रों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी नवरात्र का बुधवार के दिन आरंभ शुभ फलदायी है।
नवरात्र में कलश स्थापित करने वाले को सबसे पहले पवित्र होने के मंत्र- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ इस मंत्र से स्वयं को और पूजन सामग्रियों को पवित्र कर लेना चाहिए। इसके बाद दाएं हाथ में अक्षत, फूल और जल लेकर दुर्गा पूजन का संकल्प करना चाहिए।
माता की मूर्ति या तस्वीर के सामने कलश मिट्टी के ऊपर रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरुण देवता का आह्वान करना चाहिए। कलश में सर्वऔषधी एवं पंचरत्न डालें। कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं।
आम के पत्ते कलश में डालें। कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर इसके ऊपर एक दीप जलाएं। कलश में पंचपल्लव डालें इसके ऊपर लाल वस्त्र लपेटकर एक पानी वाला नारियल रखें।
कलश के नीचे मिट्टी में जौ के दानें फैलाएं। देवी का ध्यान करें- खड्गं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:, शंखं सन्दधतीं करैस्त्रि नयनां सर्वांग भूषावृताम। नीलाश्मद्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकाम, यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥
इसके बाद गणेशजी और सभी देवी-देवाताओं की पूजा करें। अंत में भगवान शिव और ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए।
