रावण का रोल निभाने वाले दलबीर सिंह की मौत, भाई बोला- ‘लोगों को बचाने में गई जान’

नई दिल्ली: अमृतसर ट्रेन हादसे ने कई परिवारों की जिंदगियों को सिर्फ 10 सेकेंड में बदल दिया है. शुक्रवार शाम रावण दहन देखने के लिए रेल पटरियों पर खड़े लोग ट्रेन की चपेट में आने से 60 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि 72 अन्य घायल हो गए. इस हादसे में वहां के रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले दलबीर सिंह की भी मौत हो गई. दलबीर सिंह की मां का कहना है कि बेटे की मौत के बाद उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए.
दलबीर सिंह की मां ने बताया कि  रावण दहन के दौरान रावण का किरदार निभाने वाले दलबीर सिंह भी पटरी पर ही मौजूद थे और हादसे में उनकी भी मौत हो गई. अब दलबीर की मां का कहना है कि सरकार उनकी बहू को नौकरी दे क्योंकि दलबीर का एक 8 महीने का छोटा बच्चा है. दलबीर सिंह के भाई ने बताया कि मेरा भाई लोगों की मदद कर रहा था और 7-8 लोगों को खींच-खींचकर पटरी से हटाया. इसी दौरान दलबीर का पैर पटरी में फंस गया और वो ट्रेन की चपेट में आ गया. दलबीर का मां का कहना है कि हमारा पूरा परिवार सेवादार है. सरकार को जब वोट चाहिए होता है तो वो घर-घर दरवाजा खटखटाते हैं. हमारा जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई सरकार को ही करनी होगी. पंजाब राज्य के अमृतसर में दशहरे के दिन हुए एक बड़े हादसे ने दशहरे के दिन को मातम में बदल दिया. अमृतसर में रेलवे ट्रैक के पास रावण दहन हो रहा था कि तभी ट्रैक से ट्रेन गुजरी और पटरियों पर खड़े कई लोग उसकी चपेट में आ गए. दुर्घटना की वीडियो फुटेज सामने आई है जिसमें दिख रहा है कि जब ये हादसा हुआ तब कई लोग कार्यक्रम की मोबाइल से वीडियो बना रहे थे. इस हादसे के बाद हादसे के बाद जब ट्रेन जालंधर पहुंची तो उसकी हालात ऐसी थी जो किसी का भी दिल दहला देने के लिए काफी था. ट्रेन के इंजन में और गाड़ी के कई हिस्सों पर खून के निशान थे तो गाड़ी के पहियों पर लोगों के कपड़े चिपके मिले. 

कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा 
रावण दहन के बाद भीड़ में से कुछ लोग रेल पटरियों की ओर बढ़ने लगे, जहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे. उसी वक्त दो विपरीत दिशाओं से एक साथ दो ट्रेनें आईं और लोगों को बचने का बहुत कम समय मिला. इस घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई, बदहवास लोग अपने करीबियों को तलाशने लगे. क्षत-विक्षत शव घंटों बाद भी घटनास्थल पर पड़े थे, क्योंकि नाराज लोग प्रशासन को शव हटाने नहीं दे रहे थे. कई शवों की पहचान भी नहीं हो सकी. 
 

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