दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें पानी की टंकी

कहा जाता है कि जल ही जीवन है। लेकिन, जल जीवन है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह जल है कहां का। गंगा जल है तो यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि इसे किस स्थान से लिया गया है? कानपुर से या गंगोत्री से? इसी प्रकार वास्तु शास्त्र यह दिशा-निर्देश देता है कि भवन में जलाशय कहां बनाया जाये। छत पर पानी की टंकी रखवाने या अंडरग्राउंड टैंक बनाने से पहले इन दिशा-निर्देशों पर गौर किया जाये तो कई दिक्कतों से बचा जा सकता है। पानी का टैंक उपयुक्त दिशा में नहीं होने पर व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे उन्नति में भी बाधा आ सकती है और स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। दिशा ही नहीं, पानी की टंकी का आकार व रंग भी मायने रखता है। टैंक का ऊपरी भाग गोल होना चाहिए।
0 वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण अन्य दिशा से ऊंचा और भारी होना शुभ फलदायी होता है। छत पर पानी का टैंक इस दिशा में लगाने से अन्य भागों की अपेक्षा यह भाग ऊंचा और भारी हो जाता है। इसलिए उन्नति और समृद्धि के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में पानी का टैंक लगाना चाहिए।
0 इस दिशा में टंकी लगाते समय यह भी ध्यान रखें कि उस दिशा की दीवार टैंक से ऊंची हो। इससे आय में वृद्धि होती है और लंबे समय तक मकान का सुख मिलता है।
0 यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में टंकी लगाना संभव नहीं हो, तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में विकल्प के तौर पर टंकी लगा सकते हैं। यह ध्यान रखें कि दक्षिण की दीवार टंकी से ऊंची हो।
0 उत्तर एवं पूर्व दिशा जल के लिए उत्तम है। पानी का बर्तन रसोई के उत्तर-पूर्व या पूर्व में भरकर रखें। इस दिशा में वाटर प्यूरिफायर, घड़ा अथवा दूसरे जल पात्र का होना शुभ होता है, जबकि इस दिशा में पानी का टैंक होने पर वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। इससे व्यापार में नुकसान, घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव अथवा आकस्मिक दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
0 उत्तर-पूर्व दिशा भी पानी का टैंक रखने के लिए उचित नहीं है। इससे तनाव बढ़ता है और पढ़ने-लिखने में बच्चों का मन नहीं लगता।
0 दक्षिण-पूर्व दिशा भी पानी का टैंक लगाने के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। इस दिशा को अग्नि की दिशा कहा गया है। अग्नि और पानी का मेल होने से गंभीर वास्तु दोष उत्पन्न होता है।
0 पानी का स्थान ईशान कोण है। इसलिए पानी का भूमिगत टैंक या बोरिंग पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में होनी चाहिए। पानी को ऊपर की टंकी में भेजने वाला पंप भी इसी दिशा में होना चाहिए।
0 दक्षिण-पूर्व, उत्तर-पश्चिम अथवा दक्षिण-पश्चिम कोण में कुआं या ट्यूबवेल नहीं होना चाहिए। इसके लिए उत्तर-पूर्व कोण का स्थान उपयुक्त होता है। इससे वास्तु का संतुलन बना रहता है।
0 बाथरूम पूर्व दिशा में शुभ होता है। ध्यान रखें, घर के किसी नल से पानी नहीं टपकना चाहिए।
