प्रगति रोकी तो खुद को चीन का एजेंट समझें आईएएस :सोनम वांगचुक

भोपाल। देश में राष्ट्रभक्ति सिनेमा में राष्ट्रगान गाने तक ही सीमित रह गई है l नेता और अधिकारी अपना फर्ज पूरा नहीं कर रहे हैंl अगर वे इतने ही बड़े देशभक्त होते तो बीएसएनएल और एयर इंडिया जैसी कंपनी इतना नीचे नहीं जाती और एसबीआई बैंक से प्राइवेट बैंक कभी आगे नहीं निकल पातेl यह बात देश के बर्फीले रेगिस्तान लद्दाख में बच्चों के लिए शिक्षा में सुधार का बीड़ा उठाने वाले सोनम वांगचुक ने आईएएस ऑफिर्स मीट में मेकिंग इंडिया ग्रेट व्यूज ऑफ ईट्स रिमोटेस्ट सिटीजन विषय पर विचार रखते हुए कही l उन्होंने कहा कि हमारा पड़ोसी देश 70 सालों में हमसे तीन गुना तरक्की कर गयाl वहां के लोग भारत की अपेक्षा तीन गुना ज्यादा काम करते है l उन्होंने कहा कि आईएएस के पास अपनी एक पॉवर है l वे इस पॉवर का इस्तेमाल कर समाज में नया बदलाव ला सकते है l उन्होंने कहा कि आईएएस इस पॉवर का इस्तेमाल किसी को नुकसान पहुंचाने और प्रगति रोकने में करते है तो खुद को चीन का एजेंट समझें l उन्होंने कहा कि आप के कारण कोई भी काम ठप्प होता है तो आप उनके साथ मिले हुए हों , क्योंकि चीन चाहता है कि भारत का सिस्टम ठप्प हो l उन्होंने कहा कि आप भारत के सैनिक भी हैं और एजेंट भी हो सकते हैं, लेकिन मुझे उम्मीद है, यहाँ कोई एजेंट नहीं है l उन्होंने कहा कि अधिकारी शिक्षा को प्राथमिकता बनाए। जब तक नेता और अधिकारी के बच्चे सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ेंगे तब तक स्कूलों के हालत ठीक नहीं होंगे l उन्होंने कहा कि अगर सरकारी स्कूलों को नजरअंदाज कर अवेहलना की गई तो देश की प्रगति नहीं दुर्गति होगी l उन्होंने कहा कि देश में 5% बच्चे ऐसे स्कूलों में जाते है जो अमेरिका से भी आगे है l वहीं 95% बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ते है जिनका स्तर अफ्रीका के स्कूलों से भी नीचे है l ऐसे में 95% को सम्मानपूर्वक आजीविका नहीं मिली तो वे पिस्तौल लेकर निकलेंगे और उनका टारगेट वही 5% रहेंगे जिनको उच्च स्तर पर शिक्षा मिलेगी l वांगचुक ने कहा कि भविष्य में इस संघर्ष को रोकने के लिए हमें सरकारी स्कूलों को नंबर 1 बनाना पड़ेगा l
