गणतंत्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

राष्ट्र पर्व की भोर यह,लाई है संदेश ।
रखना है हमको सदा,अपना उज्जवल वेश ।।
देशभक्ति हरसा रही,गूंजे मंगल गान।
संप्रभुता का हो रहा, चहूंओर अब मान।
यह पल है कितना सुखद, उमड़ रहा विश्वास ।
हर दिल में अब पल रही, देखो मीठी आस ।।
स्वप्न सभी पूरे हुये,हम अब हैं आजाद ।
नहीं शेष अब है 'शरद',कोई भी अवसाद ।।
लाल किले से गूंजता, जन गण मन का गान ।
हर नर नारी पा रहा, देखो अब सम्मान ।।
ऋतुएं करतीं आरती, मौसम है खुशहाल ।
सचमुच में अब दोस्तो, है यह सुख का काल ।।
हम अब सत्ताधीश हैं,हम सबकी सरकार ।
अब हमको कोई नहीं,कैसी भी दरकार ।।
अपने हाथों गढ़ रहे, हम अपनी तक़दीर ।
इसीलिए बदली हुई, हम सबकी तस्वीर ।।
शनै: शनै: हम बढ़ रहे,बस ऊपर की ओर ।
कुछ भी ना बिगडे़ 'शरद', कर ले कोई शोर ।।
यह जनतंत्री दौर है,है ख़ुद का ही अब राज ।
इसीलिए सब मिल करें,खुशहाली का काज ।।
पर्व आज यह है सुखद,संविधान का मान ।
इस गणतंत्री काल में,अब हासिल उत्थान ।।
