मसूद अजहर और हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई है बस छलावा, यह है वजह

पूरी दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद के 44 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात उद दावा (जेयूडी) और फलाह ए इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) को अपने देश में प्रतिबंधित 70 आतंकियों की सूची में शामिल कर लिया है, लेकिन हकीकत यही है कि पाकिस्तान शायद कभी हाफिज सईद और मसूद अजहर के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करेगा और ना ही वास्तव में उन्हें गिरफ्तार करेगा. उनके आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध भी आंखों में धूल झोंकने से ज्यादा कुछ नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान में बहुत आराम से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन नाम बदलकर काम करने लगते हैं. कभी उन्हें किसी भी तरह की सहायता नहीं रुकती. ये सब पाकिस्तान सरकार की जानकारी में होता है
जैश ए मोहम्मद के 44 आतंकियों की गिरफ्तारी असल में क्या है?
– अगर इसे सच कहा जाए तो हालिया वैश्विक दबाव को उसी तरह बेवकूफ बनाया जा रहा है, जैसा पाकिस्तान में दो दशकों से किया जा रहा है. इन आतंकियों को पाकिस्तान के एंटी टेरेरिज्म कानून 1997 के तहत गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि बहुत हल्की धारा में हिरासत में रखा गया है. इसमें ये बमुश्किल कुछ दिनों बाद ही रिहा हो जाएंगे.
इन आतंकियों को किस धारा में गिरफ्तार किया गया है?
– इन सभी आतंकियों को पाकिस्तान के एक कानून प्रिवेंटिव डिटेंसन फॉर इनवेस्टिगेटिव के तहत हिरासत में लिया गया है. यानि जांच के तहत ऐहतियात बरतने वाले कानून के तहत. ये कानून केवल ये कहता है कि उन्हें किसी मामले की जांच के तहत पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है. एक हफ्ते या दो हफ्ते बाद उन्हें चुपके से रिहा कर दिया जाएगा.
पाकिस्तान ये काम लंबे समय से कर रहा है. जब भी आतंकवादियों को लेकर कोई प्रेसर आता है या उन्हें सबूत सौंपे जाते हैं तो दिखावे के लिए वो कार्रवाई का ढोंग करता है लेकिन ये महज दिखाने के लिए औपचारिकता जैसा ही होता रहा है. अगर पाकिस्तान वाकई गंभीर होता तो कश्मीर में हरकत करने वाले आतंकियों पर एंटी टेरेरिज्म कानून के तहत कार्रवाई करता लेकिन उसने कभी भी ऐसा नहीं किया है.
आमतौर पर आतंकियों को बचाने के लिए पाकिस्तान की बहानेबाजी क्या होती है?
पाकिस्तान ने हमेशा भारत में किसी भी आतंकवादी गतिविधि या घटना पर सबूत की मांग की है. जब भी उसे सबूत दिए जाते हैं, तो वो उन्हें नाकाफी बताकर ये कहता रहा है कि ये सबूत पर्याप्त नहीं हैं, लिहाजा अपने देश के कानून के अनुसार वो कार्रवाई नहीं कर सकता. अव्वल तो पाकिस्तान में इन मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें आगे ही नहीं बढ़ाया जाता. मुंबई हमले में भारत ने जब पुख्ता सबूत भेजे और उसे कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ा तो ये मामला किसी तरह पाकिस्तान की अदालत में तो पहुंच गया लेकिन वहां भी वो आगे नहीं बढ़ पा रहा है,क्योंकि पाक सरकार खुद ऐसा नहीं चाहती. उसके इशारों में इसमें कोई ना कोई अड़चन पड़ती रहती है.
क्या पाकिस्तान ने कभी किसी आतंकी संगठन के खिलाफ कार्रवाई की है?
– हां, विश्व और संयुक्त राष्ट्र के दबाव में पाकिस्तान ने कई बार आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित तो किया है लेकिन ये प्रतिबंध इतना लचीला होता है कि इन आतंकी संगठनों के सरगनाओं और सदस्यों पर शायद ही कभी कोई असर पड़ा हो. वो तुरंत अपना नाम बदल लेते हैं और अपनी गतिविधियां चलाते रहते हैं. इसीलिए हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे मास्टर आतंकी बहुत आराम से पाकिस्तान में बैठकर कई आतंकवादी संगठन संचालित कर रहे हैं. इन संगठनों को आर्थिक मदद मिलती रहती है. उनके पास पूरे पाकिस्तान में काफी संपत्तियां है, जिन पर कोई आंच नहीं आती.
इन आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी सेना किस तरह मदद करती है?
– जैश के 44 आतंकियों को हिरासत में लेने की बात पर ये भी कहा जा रहा है कि दरअसल ये काम सेना के ही इशारे पर किया गया है, जिससे ये सारे आतंकी सुरक्षित रहें. माना जा रहा था कि बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद जैश के आतंकी भारत के टारगेट पर हैं. इसलिए उन्हें हिरासत में लेकर एक तरह से उन्हें सुरक्षा ही दी जा रही है.
– पाकिस्तान सेना और आईएसआई ना केवल इन आतंकियों को पनाह देती है बल्कि खतरा आने पर उन्हें आगाह भी करती है. उनके ट्रेनिंग कैंपों में खतरे की जगह से हटाकर दूसरी जगहों पर ले जाने का काम भी पाकिस्तानी सेना और आईएसआई करती आई है.
क्या पहले भी कभी पाकिस्तान में मसूद अजहर और हाफिद सईद को गिरफ्तार किया गया है?
– कई बार ऐसा हो चुका है लेकिन हमेशा उन्हें हल्की धाराओं में ही हिरासत में लिया गया है और बाद में रिहा कर दिया ताकि विश्व और खासकर भारत की आंखों में धूल झोंकी जा सके. कभी भी इन दोनों आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान एंटी टेरेरिज्म एक्ट 1997 के तहत कार्रवाई नहीं हुई है. इन दोनों के खिलाफ पाकिस्तान में कोई मामला नहीं है. उनके द्वारा संचालित संस्थाओं को पाकिस्तान सरकार और बाहर से धड़ल्ले से मदद मिलती है. वो खुलेआम पाकिस्तान में घूमते हैं. उल्टे उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने का काम भी पाकिस्तानी सरकार और सेना करती आई है. कई बार इन दोनों मास्टर माइंड को प्रिवेंटिव ऑफ डिटेसन फॉर इनवेस्टिगेशन के तहत हिरासत में लिया गया तो कई बार ब्रीच ऑफ पीस के तहत. ये दोनों ही बहुत हल्की धाराएं हैं.
जैश, जमात उत दावा और एफआईएफ के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया है?
– पाकिस्तान ने नेशनल एक्शन प्लान ऑफ पाकिस्तान के तहत जैश के 44 आतंकियों को हिरासत में लिया गया है लेकिन अब तक जैश के खिलाफ प्रतिबंध की कोई घोषणा पाकिस्तान ने नहीं की है. हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात उत दावा और एफआईएफ पर प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन माना जा रहा है कि इसकी सूचना उन्हें पहले ही दी जा चुकी थी, जिससे उन्होंने अपने इन दोनों संगठनों की संपत्तियां और अकाउंट ट्रांसफर के लिए काफी समय मिल गया. अब इन दोनों प्रतिबंधित संगठनों की जगह जल्दी ही हाफिज सईद नए आतंकी संगठन खड़़े कर लेगा और वो आराम से अपनी गतिविधियां पाकिस्तान में रहकर ही चलाने लगेगा.
हालांकि पाकिस्तान की नेशनल काउंटर टेरेरिज्म अथारिटी (एनसीटीए) की बेवसाइट पर ये दोनों आतंकी संगठन वाचलिस्ट में है. एनसीटीए की वेबसाइट तकरीबन रोज अपडेट होती है, उसमें इस बात को अपडेट नहीं किया जाना हैरत भरा ही कहा जाएगा.
जैश के आतंकियों को बचाने के लिए पाकिस्तान और क्या करने वाला है?
– पाकिस्तानी सेना ने भारत द्वारा सौंपे गए डोजिएर को गलत ठहराने के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से सारे आतंकी कैंपों को हटा दिया है. उन्हें रावलपिंडी के पास नए कैंपों में भेजा जा रहा है.
