पंजाब / सूबे में हथियारों के 3.61 लाख लाइसेंस, हर 10वें घर में एक, सर्वाधिक 29 हजार पटियाला में

जालंधर -‘मितरां नूं शौक हथियारां दा…कब्जे च’ पंजाब में लोकसभा चुनाव-2019 निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने की तैयारियां चल रही हैं। आचार संहिता लागू होने से मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा सभी जिला उपायुक्तों और एसएसपी को लाइसेंसी हथियार जमा कराने को निर्देश जारी करने के बाद करीब 2.8 लाख हथियार जमा हो चुके हैं। इसमें से 2.04 लाख हथियार दिसंबर में हुए पंचायती चुनाव में ही जमा हो गए थे।

सरकार और नेशनल डेटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस (एनडीएएल) के आंकड़ों के मुताबिक 3.61 लाख लाइसेंसी हथियार हैं। यानी सूबे के हर 10वें घर में एक हथियार है। चूंकि पंजाब हर दिन शूटिंग (गोलीबारी) की 7 मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में हथियार जमा कराने के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

आचार संहिता के दौरान हथियार जमा कराने की अनिवार्यता के बीच 30 मार्च को को खरड़ की ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्री में जोनल लाइसेसिंग अथॉरिटी डॉ. नेहा शौरी की हत्या की घटना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है। नियमानुसार कोड ऑफ कंडक्ट के 10 दिन के भीतर हथियार जमा कराने होते हैं। आदेश की अवहेलना पर संबंधित लाइसेंस धारक व्यक्ति पर आर्म्स एक्ट (1959) के तहत कार्रवाई के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान है।   

अवैध हथियार अब भी पुलिस के लिए चुनौती : 

राज्य में शायद ही कोई दिन ऐसा होगा, जब कोई अपराधी हथियारों के साथ न पकड़ा जाता हो। बड़े से बड़े गैंगस्टर से लेकर छोटी-मोटी लूट की वारदात तक को अंजाम देने वालों से किसी न किसी तरह के अवैध स्वचालित हथियार पकड़े जा रहे हैं। गैंगस्टर्स से जो भी हथियार अब तक पकड़े गए हैं उनमें से ज्यादातर विदेशी ही थे। वैसे भी गैंगस्टर्स की जितनी भी सोशल मीडिया पर फोटो वायरल हैं उनमें वे महंगे, स्वचालित विदेशी हथियारों के साथ ही दिखाई देते हैं। ऐसे में यह राज्य पुलिस के सामने यह बड़ा सवाल है कि आखिर पंजाब में इन हथियारों का जखीरा आ कहां से रहा है।

पुलिस मंजूरी से हथियार रखने की छूट सिर्फ इन्हें :
नियमानुसार मान्यता प्राप्त बैंकों के सुरक्षा गार्ड, वित्तीय संस्थानों के सुरक्षा गार्ड, संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति, राष्ट्रीय रायफल संघ व जिला रायफल संघ के साथ ही जिले के औद्योगिक संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों एवं शासकीय संस्थानों की सुरक्षा में तैनात गार्ड विशेष अनुमति पर हथियार रख सकेंगे, लेकिन इसकी जानकारी पुलिस को देनी होती है। 
 

क्या है एनडीएल-नेशनल डेटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस : 

गृह मंत्रालय के अनुसार सभी हथियार लाइसेंसधारकों (नए या पुराने दोनों) के लिए एक हथियार लाइसेंस प्रणाली बनाई गई है इसके अंतर्गत राष्ट्रीय हथियार डेटाबेस बनाया गया है। इस प्रणाली में हथियार धारक को एक यूनिक पहचान संख्या (यूआईएन) भी जारी की जाएगी। इस पहल के पीछे सरकार का मकसद यह है कि सरकार जानना चाहती है कि देश में किस-किस व्यक्ति के पास किस-किस प्रकार के हथियार हैं। शस्त्र नियम में संशोधन होने से ऐसे व्यक्तियों को हथियार लाइसेंस मिलने की संभावना खत्म हो जाएगी जिनके पूर्वजों का ट्रैक रिकॉर्ड ठीक नहीं है।
 

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