एम्स और बीएमएचआरसी का मर्जर मुश्किल 

भोपाल । राजधानी के दो बड़े चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और बीएमएचआरसी का मर्जर होना अब मुश्किल लग रहा है। सूत्रों की माने तो मर्जर करने के स्थान पर बीएमएचआरसी को विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन लाकर केरल के चित्रा इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी की तर्ज पर बेहतर बनाने की तैयारी है। इस मामले में जून में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में बैठक के बाद अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है। बीएमएचआरसी में सभी संसाधन होने के बाद भी डॉक्टरों की कमी के चलते इसे एम्स में मर्ज करने की बात केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दो साल पहले कही थी। इसके बाद स्वास्थ्य मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने भी करीब आठ महीने पहले दोनों अस्पतालों का दौरा कर इनको आपस मे मर्ज करने की सिफारिश की थी। सोमवार को मप्र हाईकोर्ट ने भी संसदीय समिति की सिफारिश के अनुसार दोनों अस्पतालों का मर्जर करने को कहा है।मर्जर के लिए बनी कमेटी के एक सदस्य ने बताया अस्पतालों को मर्ज नहीं करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, बीएमएचआरसी को बेहतर बनाने के लिए कुछ निर्णय हुए हैं। इसे डीएसटी के अधीन लाकर कई बदलाव किए जा सकते हैं। केरल में चित्रा इंस्टीट्यूट इसी तरह से चल रहा है। यह राष्ट्रीय महत्व का संस्थान हैं। यहां 253 बेड का अस्पताल संचालित है। रिसर्च के लिए यह संस्थान जाना जाता है। 
    मालूम हो कि बीएमएचआरसी में कंसल्टेंट्स के करीब 120 पदों में 40 रिक्त हैं। पांच सुपर स्पेशलिटी विभागों में एक भी डॉक्टर नहीं हैं। स्थायी भर्ती नहीं होने की वजह से डॉक्टर छोड़कर जा रहे हैं। दो विषयों में डीएनबी कोर्स चल रहा था जो डॉक्टरों की कमी के चलते बंद हो गया है। पीजी डिग्री कोर्स भी शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट की तरफ से भारत सरकार को बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं।कुछ पद ऐसे हैं जो दोनों संस्थानों में नहीं हैं, इसलिए उन्हें मर्ज करने में मुश्किल है। एक ही पद के ग्रेड पे दोनों जगह अलग-अलग हैं। ऐसे में कम ग्रेड पे को बढ़ाना होगा। एम्स के ज्यादातर डॉक्टर मर्जर के पक्ष में नहीं है।बीएमएचआरसी के डॉक्टर, नर्स व अन्य स्टाफ मर्जर के पक्ष में हैं, पर कुछ अधिकारी नहीं चाहते। 
इस बारे में डीएचआर के सचिव व डायरेक्टर आईसीएमआर डॉ. बलराम भार्गव का कहना है कि मर्जर को लेकर कमेटी बनी थी। इसमें एम्स व बीएमएचआरसी के डायरेक्टर भी थे। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद बैठक भी हो गई है। मिनिट्स तैयार हो गए हैं। अब इस पर निर्णय लिया जाना है। मंत्री की मौजूदगी में लगभग दो महीने में बैठक होगी। इसमें तय किया जाएगा कि बीएमएचआरसी को कैसे बेहतर किया जा सकता है।

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