उप्र के सुलतानपुर में गांधी बनाम गांधी होगा चुनाव प्रचार?

सुलतानपुर । उत्तरप्रदेश के सुलतानपुर में सबकुछ योजना के मुताबिक चल रहा था] तभी पिछले महीने मेनका गांधी ने अपनी सुरक्षित सीट पीलभीत को अपने बेटे वरुण गांधी को दे दिया और खुद उनकी सीट सुलतानपुर से चुनाव लड़ने आ गईं। मेनका के इस चुनावी दांव के बाद ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या कांग्रेस नेतृत्व मेनका गांधी के खिलाफ चुनाव प्रचार करेगा? भाजपा में होने के बाद भी वरुण गांधी का अपने चचेरे भाई-बहन राहुल गांधी-प्रियंका और ताईजी सोनिया गांधी से अच्छा संबंध रहा है। हालांकि मेनका गांधी के साथ ऐसा नहीं है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गांधी परिवार ने पूरे यूपी का दौरा किया था लेकिन सुलतानपुर में चुनाव प्रचार नहीं किया था जहां से वरुण गांधी चुनाव लड़ रहे थे। उधर, मेनका के साथ ऐसा कुछ नहीं है और उन्होंने हाल ही में कहा था कि यदि भाजपा नेतृत्व कहेगा तो वह अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगी। मेनका ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को भी खारिज कर दिया था। कांग्रेस के एक वरिष्ठ चुनाव प्रबंधक के मुताबिक न तो प्रियंका और न ही राहुल गांधी ने सुलतानपुर में अपने प्रत्याशी संजय सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार की योजना बनाई है।
कांग्रेस का मानना है कि भाजपा नेतृत्व मेनका से अमेठी में चुनाव प्रचार कराना चाहता है, इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है, लेकिन हो सकता है कि वह बहुत ज्यादा प्रचार न करें। सुलतानपुर में 12 मई को चुनाव होना है। बता दें कि रायबरेली, अमेठी और सुलतानपुर गांधी परिवार का गढ़ रहा है। अमेठी पहले सुलतानपुर का हिस्सा था लेकिन बाद में उसे अलग जिला बना दिया गया। वर्ष 1980 में संजय गांधी अमेठी से सांसद बने थे। वरुण की तरह ही सुलतानपुर से गांधी परिवार के सदस्य अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ते रहे हैं लेकिन एक-दूसरे से कभी भिड़ नहीं। वर्ष 1999 में राजीव गांधी के रिश्तेदार अरुण नेहरू ने रायबरेली से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय सोनिया राजनीति में नई थीं और खुद को जनता से जोड़ने का प्रयास कर रही थीं। चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी ने रायबरेली की जनता से बेहद भावुक अपील की थी। उन्होंने कहा, 'क्या आप उस आदमी को वोट दोगे जिसने मेरे पिता की पीठ में छूरा भोका था? प्रियंका की यह अपील काम कर गई और सोनिया गांधी ने जीत दर्ज की।
