शनैः-शनैः गर्म हो रहा सियासत का पारा

जबलपुर। लोकसभा चुनाव के लिये नामांकन प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद आज १२ अप्रैल को नाम वापसी की प्रक्रिया भी पूरी होगी। इसके बाद जबलपुर संसदीय क्षेत्र की तस्वीर एक दम साफ होगी। एक तरफ जहां अप्रैल के महीने में तापमान का पारा ऊपर चढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर सियासत का पारा भी जमकर उछाल ले रहा है। एक हफ्ते बाद राष्ट्रीय नेताओं के दौरे शुरू होंगे तब सियासत और गर्म होगी। आज-कल मतदाता खामोश रहता है। मतदान के दिन ही वह अपना पैâसला ईवीएम में वैâद कर देता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी तपती धूप में पसीना बहाकर मतदाताओं को लुभाने का काम कर रहे हैं। भाजपा के पास राष्ट्रवाद और मोदी का नाम है तो कांग्रेस मोदी के कार्यकाल की विफलता और जबलपुर जनता के सपनों का शहर बनाने का सपना दिखा रही है। विकास के मुद्दे चुनाव परिदृश्य से बाहर हो गये हैं। राफेल खरीदी में घोटाले में जहां कांग्रेस जोर-शोर से उठा रही है, वहीं भाजपा ने अब प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार को मुद्दा बना लिया है। जहां तक जबलपुर संसदीय क्षेत्र का सवाल है तो यहां कांग्रेस, भाजपा प्रत्याशी एवं मौजूदा सांसद राकेश सिंह से १५ साल का हिसाब मांग रही है। कांग्रेस विवेक कृष्ण तन्खा अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रहे हैं और बेरोजगारी व मंहगाई के मुद्दे पर भाजपा को घेर रहे हैं। लेकिन चुनाव प्रचार अभियान में भाजपा ने गति पकड़ रखी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते राकेश िंसह के साथ भाजपा का नगर संगठन और ग्रामीण संगठन चुनाव मैदान में जनसंपर्क करने उतर चुका है। जबकि कांग्रेस का दारोमदार प्रत्याशी के अलावा दोनों मंत्रियों और एक शहरी व एक ग्रामीण विधायक के जिम्मे है। कांग्रेस के संगठन में यू तो लम्बी-चौड़ी फौज है लेकिन इसके बाद भी अब तक मैदानी स्तर पर कोई सामने नहीं आया है। चुनाव नजदीक आते-आते तक कांग्रेस भी फुल फार्म में मैदान में दिखेगी ऐसी संभावना जताई जा रही है। अभी संगठन रणनीति बनाने में चुटा हुआ है तो मंत्री, विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय नजर आ रहे हैं।
