अकोला लोकसभा सीट / कपास सिटी पर लगातार 3 बार से भाजपा का कब्जा, पार्टी ने फिर जमाया संजय धोत्रे पर भरोसा

अकोला: महाराष्ट्र के विदर्भ में स्थित अकोला लोकसभा सीट पर पिछले लगभग 15 सालों से भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। इस सीट से संजय धोत्रे लगातार तीन बार से सांसद हैं। पार्टी ने उन पर फिर भरोसा दिखाते हुए उन्हें फिर मैदान में उतारा है। इस बार अकोला से 5 निर्दलीय समेत कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां 18 अप्रैल को चुनाव होना है।

'कपास सिटी' के नाम से प्रसिद्ध है यह शहर 

ताप्ती नदी घाटी क्षेत्र में स्थित अकोला एक वाणिज्यिक केन्द्र है। जहां मुख्यत: कपास का व्यापार होता है इसी कारण इसे 'कपास सिटी' भी कहा जाता है, अकोला एक महत्वपूर्ण शैक्षिक केंद्र भी है और यहां अमरावती विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय भी हैं, यहां की कुल आबादी 22 लाख 11 हजार 204 है, जिसमें से 65 प्रतिशत लोग गांवों में और 34 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।

इनके बीच है लड़ाई

इस बार वर्तमान सांसद संजय धोत्रे की लड़ाई कांग्रेस के  हिदायतुल्ला बरकतुल्लाह पटेल से है। वे 2014 में भी यहां से उम्मीदवार थे। इस सीट से वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर भी चुनाव मैदान में हैं। वे इन दोनों पार्टियों का खेल बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भाई बीसी कांबले को टिकट दिया है। यहीं से बहुजन मुक्ति पार्टी से प्रवीण लक्ष्मणराव भाटकर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) से अरुण कंकर वानखेड़े मैदान में उतरे हैं। इसके अवाला 5 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। 

साल 2014 का चुनावी आंकड़ा

संजय धोत्रे ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता हिदायतुल्ला पटेल को हराया था। संजय शामराव धोत्रे को 4,56,472 वोट मिले थे जबकि हिदायतुल्ला को कुल 2,53,356 वोट ही मिले थे।

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में संजय शामराव धोत्रे की उपस्थिति 84 प्रतिशत रही है और इस दौरान उन्होंने 27 डिबेट में हिस्सा लिया है और 569 प्रश्न पूछे हैं।

यहां की 6 में से 4 विधानसभा पर भाजपा का कब्जा

अकोला लोकसभा क्षेत्र में अकोट, बालापुर, अकोला पूर्व, अकोला पश्चिम, मूर्तिजापुर और रिसोड विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जिनमें अकोट, अकोला पश्चिम, अकोला पूर्व, मूर्तिजापुर विधानसभा सीटों पर अभी बीजेपी का कब्जा है। जबकि रिसोड़ पर कांग्रेस का विधायक है। वहीं बालापुर विधानसभा पर भारिप बहुजन महासंघ के हिस्से में है।

अकोला सीट का इतिहास

अकोला लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ थी। 1957 से 1967 तक यहां लगातार कांग्रेस को जीत मिली। इस सीट के इतिहास पर नजर डाली जाए तो अकोला में 1952 और 1957 में हुए पहले दो आम चुनाव में दो-दो सांसद निर्वाचित हुए। अकोला से 1952 में कांग्रेस के लक्ष्मण भातकर आरक्षित सीट से चुने गए थे। जबकि, खुले प्रवर्ग से गोपालराव खेडकर सांसद चुने गए। इसके बाद 1957 में दोनों नेता दोबारा लोकसभा पहुंचे। फिर 1967 में हुए दूसरे आम चुनाव में यह प्रक्रिया खत्म कर दी गई।

इसके बाद 1971-72 के उपचुनाव में भी कांग्रेस के असगर हुसैन जीते, फिर उनकी मृत्यु के बाद यहां उपचुनाव हुए और भारतीय रिपब्लिकन पार्टी (खोब्रागड़े गुट) की ओर से पहली बार वसंत साठे ने जीत दर्ज की। उनके बाद वसंत साठे ने 1977 में कांग्रेस के टिकट पर दोबारा जीत हासिल की। फिर मधुसूदन वैराले यहां जीत दर्ज करने में सफल रहे। वो 2 बार कांग्रेस की टिकट पर सांसद रहे।

ऐसे हुई भाजपा की एंट्री

1989 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से पांडुरंग फुंडकर ने जीत दर्ज कर यहां से भारतीय जनता पार्टी की एंट्री करवाई। वह यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीते। उनके बाद 1998 में हुए उपचुनाव में प्रकाश आंबेडकर भारिप की ओर से विजयी हुए और 1999 में भी वे कांग्रेस के समर्थन से चुनाव जीते। 2004 से लेकर 2014 तक वो संजय धोत्रे के हाथों मात खाते आ रहे हैं।

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