महिला उम्मीदवार के लिए लकी है अमरावती, पिछले 25 साल से यहां शिवसेना का कब्जा

अमरावती. लोकसभा सीट पर पिछले 25 सालों से शिवसेना का कब्जा रहा है। वर्तमान में आनंदराव अडसुल यहां से सांसद हैं। इस सीट के लिए कहा जाता है कि यहां से लड़ने वाली महिला उम्मीदवार कभी अपना चुनाव नहीं हारी है। अमरावती सीट पर दूसरे चरण में यानी 18 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इस बार यहां से 24 उम्मीदवार मैदान में हैं। अमरावती शहर इन्द्र देवता की नगरी के रूप में भी विख्यात है। अमरावती लोकसभा सीट एससी के लिए आरक्षित सीट है। अमरावती लोकसभा सीट की कुछ तहसीलें वर्धा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आती है जिनमें मोर्शी, वरुड, चांदुर रेलवे, और धामणगांव रेलवे शामिल है।

इनके बीच इस बार है लड़ाई

इसबार अमरावती सीट से 24 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। शिवसेना ने इस बार भी मौजूदा सांसद अड़सुल आनंदराव को ही चुनाव मैदान में उतारा है। उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस-एनसीपी महागठबंधन में शामिल अमरावती की युवा स्वाभिमान पार्टी के अध्यक्ष रवि राणा की पत्नी नवनीत कौर राणा से होने वाला है। वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अरुण वानखेड़े को प्रत्याशी घोषित किया है। बहुजन महा पार्टी ने संजय अठावले को टिकट दिया है जबकि 15 निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

साल 2014 का चुनावी गणित

2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से शिव सेना के आनंदराव अडसुल ने 4 लाख 67 हजार 212 वोट हासिल किए थे और 1 लाख 37 हजार 932 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। अमरावती लोकसभा सीट पर दूसरे स्थान पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नवनीत रवि राणा रहे थे, जिन्होंने 3 लाख 29 हजार 280 वोट हासिल किए थे। बहुजन समाज पार्टी के गुणवंत 98 हजार 200 वोट पाकर तीसरे तो आईपीआई के राजेंद्र रामकृष्णा 54 हजार 278 वोट पाकर चौथें स्थान पर रहे थे। 

वर्तमान सांसद का रिपोर्ट कार्ड

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक आनंदराव अडसुल की पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उपस्थिति 85 प्रतिशत रही है तो वहीं इस दौरान उन्होंने 59 डिबेट में हिस्सा लिया है और 967 प्रश्न पूछे हैं।

महिलाओं के लिए 'लकी' है यह सीट

अमरावती लोकसभा सीट की खास बात यह है कि जितनी बार भी यहां से प्रमुख दलों की महिला प्रत्याशी उतरीं, उन्हें जीत हासिल हुई। कांग्रेस से पहली बारी ऊषा चौधरी को 1980 में अमरावती लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा और वो जीतकर संसद पहुंचीं। वहीं 1991 में प्रतिभा पाटिल को कांग्रेस ने टिकट द‍िया। उन्होंने श‍िवसेना के प्रकाश पाटिल को हराया। हालांकि, इस सीट से प्रतिभा पाटिल केवल एक ही बार चुनाव लड़ीं। बता दें कि प्रतिभा पाटिल भारत की 12वीं राष्ट्रपति भी रह चुकी हैं।

6 विधानसभा से मिलकर बनी अमरावती

अमरावती लोकसभा सीट में 6 विधानसभा आते हैं। इनमें बड़नेरा, अमरावती, तिवसा, दर्यापुर, मेलघाट और अचलपुर शामिल हैं। अमरावती, दर्यापुर, मेलघाट विधानसभा सीट बीजेपी के पास है तो वहीं तिवसा सीट पर कांग्रेस का दबदबा है. बड़नेरा और अचलपुर सीट निर्दलीय के पास हैं।

21 लाख है यहां की जनसंख्या 

12,210 वर्ग कि.मी के क्षेत्रफल में फैले इस शहर की जनसंख्या 21,77,082 है, जिसमें से 59 प्रतिशत लोग गांवों में और 40 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं। 

अमरावती लोकसभा का इतिहास

देश को आजादी मिलने के बाद 1951 में हुए लोकसभा चुनाव में पहली बार चुनाव जीतकर कांग्रेस के उम्मीदवार पंजाबराव देशमुख संसद भवन पहुंचे थे। उनके बाद से ही यह सीट कांग्रेस की गढ़ कही जाने लगी और इस सीट से 1984 तक कांग्रेस का ही उम्मीदवार चुनाव जीतकर संसद भवन पहुंचता रहा है। लेकिन यह सीट कांग्रेस के हाथ से 1989 से निकल गई। हालांकि एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल इस सीट से 1991 में चुनाव जीतने में कामयाब हुई। लेकिन 1996 से यह सीट कांग्रेस के पास फिर से वापस नहीं आई। जिसे बाद से लगातार शिवसेना इस सीट से जीत हासिल करती आ रही है।

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